नयी दिल्ली, 25 जून दिल्ली की एक अदालत ने फरवरी में सीएए विरोधी प्रदर्शनों के दौरान उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई सांप्रदायिक हिंसा से जुड़े एक मामले में एक निजी स्कूल के मालिक को यह कहते हुए पुलिस हिरासत में भेजने से इनकार कर दिया कि आवेदन दायर करने में चार महीने का विलंब हो गया है, जबकि घटना के पहले दिन से ही संबंधित तथ्य जांच अधिकारी की जानकारी में थे।
शिव विहार कॉलोनी स्थित राजधानी स्कूल का मालिक फैसल फारूक उन 18 लोगों में शामिल था जिन्हें डीआरपी कॉन्वेंट स्कूल के पास संपत्ति को जलाने तथा नष्ट करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
यह भी पढ़े | पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के विरोध में तेजस्वी यादव ने साइकिल से किया मार्च.
मामले में उसे 20 जून को जमानत दे दी गई थी, लेकिन दो दिन बाद उसे इलाके में दंगे से जुड़े एक अन्य मामले में गिरफ्तार कर लिया गया था।
मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ऋचा परिहार ने दंगे से जुड़े दूसरे मामले में यह कहते हुए फारूक को न्यायिक हिरासत में भेज दिया कि दोनों प्राथमिकियों में आरोप और तथ्य एक जैसे हैं।
अदालत ने 24 जून के अपने आदेश में कहा कि जिन दो घटनाओं के सिलसिले में आरोपी को गिरफ्तार किया गया, उन दोनों घटनाओं के घटित होने की तारीख एक ही है, और इस तरह दोनों प्राथमिकियों में कथित अपराध से जुड़ी चीजें ‘कमोबेशे’ एक जैसी हैं।
न्यायाधीश ने कहा, ‘‘यह रिकॉर्ड में है कि आरोपी फैसल फारूक को (पहले) मामले में गिरफ्तार किया गया था और इस आधार पर तीन दिन की पुलिस हिरासत में लिया गया था कि उसे उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड के विभिन्न हिस्सों और दिल्ली के कुछ हिस्सों में ले जाया जाना है।’’
उन्होंने कहा कि दोनों प्राथमिकियों में आरोप और तथ्य एक जैसे हैं। आवेदन दायर करने में चार महीने का विलंब हो गया है, जबकि घटना के पहले दिन से ही संबंधित तथ्य जांच अधिकारी की जानकारी में थे। इसके अलावा, दोनों मामले एक ही थाने, दयालपुर में दर्ज किए गए थे।
न्यायाधीश ने कहा, ‘‘सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद मुझे नहीं लगता कि यह आरोपी को पुलिस रिमांड पर भेजने का उपयुक्त मामला है।’’
पुलिस ने अपने आवेदन में आरोपी का चार दिन का रिमांड मांगते हुए कहा कि उसे मामले में सह-आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी करनी है तथा संबंधित सबूत जुटाने हैं।
जांच अधिकारी ने सुनवाई के दौरान कहा कि स्कूल के आसपास दंगों के मामले में 76 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं और मौजूदा मामले के तथ्य पहले मामले से भिन्न हैं जिसमें फारूक को गिरफ्तार किया गया था।
पुलिस ने कहा कि आरोपी को आगे की जांच के लिए उत्तर प्रदेश के देवबंद ले जाए जाने की आवश्यकता है।
फारूक की ओर से पेश हुए वकील आर के कोचर ने अदालत से कहा कि आरोपी की पुलिस हिरासत मांगने का आवेदन कानून की प्रक्रिया का उल्लंघन है।
उन्होंने दावा किया कि फारूक को 22 जून को सिर्फ इसलिए गिरफ्तार किया गया, ताकि 20 जून को उसे मिली जमानत के उद्देश्य को विफल किया जा सके।
निचली अदालत ने आरोपी को इस आधार पर जमानत दे दी थी कि प्रथम दृष्टया यह स्थापित नहीं हो पाया कि वह घटना के समय घटनास्थल पर मौजूद था।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के आदेश को पुलिस के चुनौती देने के बाद 22 जून को आरोपी की जमानत पर रोक लगा दी थी।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY