नयी दिल्ली, दो नवंबर उत्तर पूर्व दिल्ली में फरवरी में हुए दंगों से जुड़े एक मामले में दाखिल भारी-भरकम आरोपपत्र की हार्ड कॉपियां आरोपियों को देने के लिए धन की मंजूरी प्राप्त करने के लिहाज से पुलिस को और समय देने से मना करते हुए यहां की एक अदालत ने कहा कि उनसे जल्द कार्रवाई की अपेक्षा की जाती है।
अदालत ने नौ अक्टूबर को पुलिस को 17,000 से अधिक पन्नों के आरोपपत्र की ताजा प्रतियां दाखिल करने का निर्देश दिया था। अदालत को सूचित किया गया था कि ‘अनजाने में’ कुछ संरक्षित गवाहों के ब्योरे वाले दस्तावेजों को मामले में गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम के तहत निरुद्ध आरोपियों को दी गयी प्रतियों में रख दिया गया था।
यह भी पढ़े | West Bengal Local Train Update: पश्चिम बंगाल में 50 फीसदी यात्रियों के साथ दोबारा शुरू होगी लोकल ट्रेन.
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत को जांच अधिकारी ने 21 अक्टूबर को सूचित किया था कि उन्होंने 16 नयी पेन ड्राइव जमा की हैं जिनमें आरोपपत्र का संपादित संस्करण है।
अदालत ने आरोपियों और उनके वकीलों को ताजा आरोपपत्र की हार्ड और सॉफ्ट प्रतियां प्रदान करने का निर्देश दिया।
यह भी पढ़े | हरियाणा में कोरना के 1,566 नए मामले, 15 की मौत: 2 नवंबर 2020 की बड़ी खबरें और मुख्य समाचार LIVE.
इस पर जांच अधिकारी ने कहा कि प्रत्येक आरोपी को हार्ड कॉपी प्रदान करने के लिए धन की मंजूरी दिल्ली सरकार से ली जानी है और उन्होंने 15 दिन का समय मांगा।
अदालत ने 21 अक्टूबर को जारी अपने आदेश में कहा कि वह इन दलीलों से संतुष्ट नहीं है।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)











QuickLY