भाजपा सदस्य सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि उच्च न्यायालय ने भी राज्य के वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुरूप निगमों को पैसे देने को कहा था। इसके बाद भी दिल्ली सरकार बजट में प्रावधान करने के बावजूद तीनों निगमों को पैसे नहीं दे रही। उन्होंने कहा कि अदालत ने दिल्ली सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना मुहल्ला क्लीनिक को लेकर भी प्रतिकूल टिप्पणी की।
तीनों निगमों के एकीकरण के प्रस्ताव का समर्थन करते हुए भाजपा सदस्य ने कहा कि भारत वैश्विक उभरती शक्ति है और दिल्ली में तीन मेयर हैं। उन्होंने कहा कि अगर अंतरराष्ट्रीय मंच पर दिल्ली का प्रतिनिधित्व करना हो तो कौन मेयर प्रतिनिधित्व करेंगे। उन्होंने कहा कि निगमों के एकीकरण से संसाधनों के बीच संतुलन कायम हो सकेगा। उन्होंने कहा कि दिल्ली की जनता पर 150 करोड़ रुपये का अधिभार लग रहा है, उसमें भी कमी आएगी।
उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार ने निगमों के साथ सौतेला व्यवहार किया। उन्होंने कहा कि तीनों निगमों के संसाधनों और दायित्वों में भी विसंगति थी वहीं संबंधित क्षेत्रों में करदाताओं की संख्या में भी भारी भिन्नता थी। उन्होंने कहा कि निगमों को 40,000 करोड़ रुपये की जरूरत थी लेकिन उसे सिर्फ 6,000 करोड़ ही आवंटित किए गए। इसके बाद भी निगमों ने बेहतरीन काम किया और दर्जनों नए स्कूल खोले वहीं दिल्ली सरकार ने कॉलेजों को पैसे देने में हाथ खड़े कर दिए।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर परोक्ष रूप से हमला बोलते हुए उन्होंने दावा किया कि नयी राजनीति के प्रणेता ने तमाम बातें की थीं लेकिन बार बार वह अपने बयान से हटते रहे।
इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ‘दिल्ली नगर निगम (संशोधन) विधेयक, 2022’ को चर्चा के लिए उच्च सदन में रखते हुए आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार राष्ट्रीय राजधानी के तीनों नगर निगमों के साथ ‘सौतेली मां’ जैसा व्यवहार कर रही है। उन्होंने कहा कि तीनों निगमों के एकीकरण का मकसद उनकी नीतियों और संसाधनों में विसंगतियों को दूर करना है जिससे लोगों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
शाह ने 10 वर्ष पहले दिल्ली नगर निगम को तीन निगमों- उत्तर, दक्षिण और पूर्वी नगर निगमों में बांट दिया गया था लेकिन इस फैसले के पीछे की मंशा अभी तक स्पष्ट नहीं हुई है।
शाह ने कहा कि उन्होंने गृह मंत्रालय में इसका कारण खंगाला लेकिन रिकार्ड में कोई जानकारी नहीं मिली। उन्होंने कहा कि निगमों के बंटवारे के बारे में तत्कालीन सरकार की मंशा के बारे में कुछ पता नहीं चला। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इसके पीछे मकसद अच्छा ही रहा होगा लेकिन उसके अपेक्षित परिणाम नहीं आए।
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