देश की खबरें | भाकपा ने भी डाक मतपत्र से मतदान संबंधी आयु सीमा कम करने का फैसले का विरोध किया

नयी दिल्ली, छह जुलाई भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने कोरोना वायरस महामारी के चलते वरिष्ठ नागरिकों को डाक मतपत्र से मतदान की सुविधा देने के संदर्भ में आयु सीमा घटाकर 65 साल करने के फैसले का विरोध करते हुए सोमवार को आरोप लगाया कि इससे स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव की लोकतांत्रिक प्रकिया के लिए खतरा पैदा होगा।

इससे पहले कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और माकपा मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा को पत्र लिखकर इस निर्णय का विरोध कर चुकी हैं।

यह भी पढ़े | कोरोना के महाराष्ट्र में 5,368 नए मरीज पाए गए, 204 लोगों की मौत: 6 जुलाई 2020 की बड़ी खबरें और मुख्य समाचार LIVE.

भाकपा महासचिव डी राजा ने अरोड़ा को लिखे पत्र में कहा कि यह फैसला बिहार विधानसभा चुनाव से पहले किया गया है और इससे स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव की लोकतांत्रिक प्रकिया के लिए खतरा पैदा होगा।

उन्होंने आग्रह किया कि डिजिटल चुनाव प्रचार करने और डाक मतपत्र से जुड़ी आयुसीमा घटाने के फैसले पर व्यापक और पारदर्शी ढंग से विचार-विमर्श होना चाहिए।

यह भी पढ़े | राजधानी दिल्ली में COVID-19 से संक्रमितों का आंकड़ा 1 लाख के पार पहुंचा, 24 घंटे में 1379 नए केस.

गौरतलब है कि कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के बीच वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लोकसभा और विधानसभा चुनावों में डाक मतपत्र के लिए मतदाताओं की आयु सीमा कम कर दी गयी है।

विधि मंत्रालय ने अक्टूबर 2019 में चुनाव कराने के नियमों में संशोधन किया था और दिव्यांगों तथा 80 साल या इससे अधिक उम्र के लोगों को लोकसभा और विधानसभा चुनावों में डाक मतपत्र से मतदान की अनुमति प्रदान की थी। अब मंत्रालय ने 19 जून को जारी ताजा संशोधन में 65 वर्ष या इससे अधिक उम्र के लोगों को डाक मतपत्र के इस्तेमाल की अनुमति दी है।

भारत में कोरोना वायरस के प्रकोप के बाद बिहार पहला राज्य है जहां विधानसभा चुनाव होने हैं और इस राज्य के मतदाता उक्त संशोधित नियम का सबसे पहले लाभ उठाएंगे।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)