देश की खबरें | न्यायालय ने वकीलों की वित्तीय परेशानियों का संज्ञान लिया
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने कोविड-19 महामारी की वजह से देश में अदालतों का कामकाज सीमित होने के कारण वकीलों के सामने वित्तीय परेशानियों का बुधवार को संज्ञान लेते हुये वकीलों को राहत मुहैया कराने हेतु कोष स्थापित करने के बारे में केन्द्र और सभी बार संगठनों से जवाब मांगा।
नयी दिल्ली, 22 जुलाई उच्चतम न्यायालय ने कोविड-19 महामारी की वजह से देश में अदालतों का कामकाज सीमित होने के कारण वकीलों के सामने वित्तीय परेशानियों का बुधवार को संज्ञान लेते हुये वकीलों को राहत मुहैया कराने हेतु कोष स्थापित करने के बारे में केन्द्र और सभी बार संगठनों से जवाब मांगा।
कोविड-19 महामारी की वजह से न्यायिक कामकाज बुरी तरह प्रभावित होने के कारण वित्तीय संकट का सामना कर रहे वकीलों को आसान कर्ज उपलब्ध कराने सहित वित्तीय सहायता के लिये वकीलों की शीर्ष संस्था बार काउन्सिल ऑफ इंडिया ने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर कर रखी है।
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प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमणियन की पीठ ने केन्द्र को नोटिस जारी किया और उससे दो सप्ताह के भीतर इस याचिका पर जवाब मांगा।
पीठ ने सुनवाई शुरू होते ही बीसीआई की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मनन कुमार मिश्रा से कहा कि न्यायालय जरूरतमंद वकीलों से संबंधित मुद्दों को खुद ही लेना चाहता है। इसके साथ ही उसने केन्द्र, बीसीआई और राज्यों की बार काउन्सिल और बार एसोसिएशनों को नोटिस जारी किये। इन सभी से दो सप्ताह के भीतर जवाब मांगा गया है।
केन्द्र की ओर से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता और बीसीआई की ओर से मिश्रा ने नोटिस स्वीकार किये।
शीर्ष अदालत ने विभिन्न उच्च न्यायालय में इसी तरह की लंबित याचिकाओं के उच्चतम न्यायालय में स्थानांतरण के लिये बीसीआई की ओर से दायर याचिका पर भी नोटिस जारी किया।
पीठ ने कहा कि इस महामारी ने देश के वकीलों की बिरादरी सहित सभी नागरिकों को प्रभावित किया है लेकिन बार काउन्सिल ऑफ इडिया के नियमों के अनुसार वकील अपनी आजीविका के लिये कोई दूसरा पेशा नहीं अपना सकते हैं। वकालत ही उनकी आमदनी का एकमात्र स्रोत है।
पीठ ने कहा कि अदालतों में सामान्य कामकाज शुरू करने की लगातार मांग हो रही है, लेकिन अदालत का सामान्य कामकाज शुरू करने से न्यायाधीशों, वकीलों और अदालतों के कर्मचारियों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। मेडिकल सलाह यही है कि अभी अदालतों में सबकी मौजूदगी में मुकदमों की सुनवाई शुरू नहीं की जाये।
पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘इसलिए हम उच्च न्यायालयों की सभी बार एसोसिएशनों को कारण बताओ नोटिस जारी करना उचित समझते हैं कि क्यों नही राहत के लिये कोष स्थापित किया जाये और उसे चंदा मांगने की अनुमति दी जाये और यह वित्तीय सहायता प्रदान करने के मानक निर्धारित करने के लिये जरूरी होना चाहिए।’’
पीठ ने कहा कि सभी राज्य बार काउन्सिल और बार एसोसिएशनों को प्रत्येक उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल के माध्यम से नोटिस जारी किये जायें।
बार काउन्सिल ऑफ इंडिया ने अपनी याचिका में केन्द्र और सभी राज्य सरकारों को यह निर्देश देने का अनुरोध किया है कि वे अदालतें बंद होने तथा उनमें कामकाज सीमित होने की वजह से जरूरतमंद वकीलों को वित्तीय सहायता और आसान कर्ज उपलब्ध करायें ताकि वे अपने परिवारों की देखभाल कर सकें।
कोरोना वायरस महामारी की वजह से लागू लॉकडाउन के कारण देश भर में अदालतें मार्च महीने से ही सिर्फ आवश्यक मामलों की सुनवाई कर रही हैं जिसकी वजह से आम वकीलों को बहुत अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
याचिका में केन्द्र और राज्यों को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि वे बार काउन्सिल में पंजीकृत वकीलों को तीन लाख रुपए तक ब्याज रहित ऋण मुहैया करायें। याचिका में कहा गया है कि राज्य बार काउन्सिल के माध्यम से वितरित किये जाने वाले इस ऋण की अदायगी अदालतों में सामान्य तरीके से कामकाज शुरू होने के बाद कम से कम 12 किस्तों में की जायेगी।
अनूप
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(The above story first appeared on LatestLY on Jul 22, 2020 08:37 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

