नयी दिल्ली, 16 जून दिल्ली उच्च न्यायालय ने आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता सत्येन्द्र जैन से जुड़े धन शोधन के एक मामले में सह-आरोपियों वैभव जैन और अंकुश जैन की जमानत अर्जियों पर शुक्रवार को प्रवर्तन निदेशालय से उसका रूख पूछा है।
न्यायमूर्ति विकास महाजन की अवकाश पीठ ने जमानत अर्जी पर नोटिस जारी किया और ईडी से जांच की स्थिति रिपोर्ट मांगी।
यह मुकदमा सत्येन्द्र जैन द्वारा कथित रूप से उनसे जुड़ी चार कंपनियों के माध्यम से धन शोधन करने से जुड़ा है और ईडी ने दावा किया है कि वैभव जैन और अंकुश जैन दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री के व्यावसायिक साथी है और उन्होंने इस अपराध के लिए उकसाया है।
ईडी ने सत्येन्द्र जैन को पिछले साल 30 मई को गिरफ्तार किया था।
इससे पहले दोनों आरोपियों ने निचली अदलत में जमातन की अर्जी देकर दावा किया था कि चूंकि उनके खिलाफ दाखिल आरोपपत्र अधूरा है इसलिए उन्हें स्वत: जमानत मिल जानी चाहिए।
निचली अदालत ने 24 मई को अर्जी खारिज कर दी थी और कहा था कि आरोपपत्र पूरा है, अगर अदालत उसके (आरोप पत्र के) आधार पर और उसके साथ दिए गए दस्तावेज के आधार पर अपने विवेकानुसार अपराध पर संज्ञान लेने में सक्षम है।
ईडी ने इस आधार पर उनकी अर्जियों का विरोध किया है कि उन्हें धन शोधन के मामले में 30 जून, 2022 को गिरफ्तार किया गया था और 60 दिनों की तय अवधि से काफी पहले 27 जुलाई, 2022 को आरोपपत्र दाखिल कर दिया था।
ईडी ने भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत सीबीआई द्वारा 2017 में सत्येन्द्र जैन के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी पर आधारित एक धन शोधन के मामले में गिरफ्तार किया है।
मामले में अगली सुनवाई 26 जून को होनी है।
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