नयी दिल्ली, आठ जून दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक याचिका पर सोमवार को आप सरकार से जवाब मांगा । याचिका में सरकारी और निजी अस्पतालों को कोविड-19 के लक्षण वाले और बिना लक्षण वाले मरीजों को भर्ती करने से मना नहीं करने के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।
याचिका में यह भी निर्देश देने का आग्रह किया गया है कि अस्पतालों को आपात स्थिति में पहले कोरोना वायरस की जांच के लिए जोर नहीं देना चाहिए ।
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न्यायमूर्ति डी एन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जैन की पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए सुनवाई की और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया ।
मामले में अब 25 जून को सुनवाई होगी ।
पीठ वकील और याचिकाकर्ता कृष्ण कुमार शर्मा की याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिन्होंने मरीजों से पीपीई किट के लिए ज्यादा रकम नहीं लेने और उचित मूल्य लेने के निर्देश का अनुरोध किया है ।
कोविड-19 महामारी के समय उपचार से मना करने वाले सरकारी और निजी अस्पतालों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई किए जाने का भी उन्होंने अनुरोध किया है ।
वकील के एम मोनिका के जरिए दाखिल याचिका में अनुरोध किया गया है कि सरकारी और निजी अस्पतालों में किसी मरीज को भर्ती करने के पहले कोविड-19 की जांच के लिए विवश नहीं करना चाहिए।
याचिका में कहा गया है , ‘‘कई निजी अस्पतालों ने भर्ती करने से पहले कोविड-19 की जांच को जरूरी कर दिया है जबकि प्रतिवादी (दिल्ली सरकार) पहले ही इस मुद्दे पर एक स्पष्टीकरण जारी कर चुकी है कि अस्पताल प्रशासन बिना लक्षण वाले मरीजों की जांच नहीं कराए।’’
याचिकाकर्ता ने उच्च न्यायालय को बताया कि कई अस्पताल डायलिसिस, खून चढ़ाने, कीमोथैरेपी और प्रसव जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं प्रदान करने से भी टालमटोल कर रहे हैं ।
याचिका में कहा गया है, ‘‘कई जगहों पर ऐसा देखा गया है कि अस्पताल सेवाएं प्रदान करने के पहले कोविड-19 की जांच कराने पर जोर दे रहे हैं। दिल्ली सरकार कई निर्देश जारी कर चुकी है कि महामारी के दौरान कोई भी सरकारी या निजी अस्पताल या नर्सिंग होम अगर जरूरी चिकित्सा सेवा मुहैया कराने से मना करता है तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।’’
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