नयी दिल्ली,22 जुलाई रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ सी. राजामोहन ने बुधवार को कहा कि चीन को पूर्वी लद्दाख और एशिया के अन्य हिस्सों जैसी गलत जगहों पर अपनी आक्रमकता दिखाने का अंजाम भुगतना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि चीन की दुस्साहसपूर्ण गतिविधियां उन पड़ोसी देशों में ‘‘राष्ट्रवादी जवाबी-प्रतिक्रिया’’ पैदा कर सकती है, जो वर्चस्व स्थापित करने की किसी कोशिश को स्वीकार नहीं करेंगे।
सिंगापुर में एक प्रतिष्ठित अध्ययन संस्थान का नेतृत्व कर रहे प्रो. सी राजामोहन ने यह भी कहा कि पूर्वी लद्दाख में चीन की दुस्साहसपूर्ण गतिविधियों तथा कहीं अधिक जमीन हथियाने की उसकी अस्वीकार्य लालसा ने उसके साथ भारत के संबंधों को बुनियादी स्तर पर नये सिरे से निर्धारित करने की परिस्थितियां पैदा की हैं और परस्पर विश्वास बहाली की तीन दशकों की कोशिशों को नुकसान पहुंचाया है।
चीन, दक्षिण चीन सागर और पूर्वी चीन सागर में भी समान रूप से आक्रामक रहा है तथा वियतनाम, इंडोनेशिया, फिलिपीन और मलेशिया जैसे देशों के लिये संकट की स्थिति पैदा की है।
प्रो. राजामोहन ने कहा कि चीन गलत जगहों पर अपनी आक्रामकता दिखाने का अंजाम भुगतेगा क्योंकि यह क्षेत्र में शक्ति को पुनर्संतुलित करने की मुहिम सहित ‘‘राष्ट्रवादी जवाबी प्रतिक्रियाएं’’ शुरू कर सकती है।
उन्होंने कहा, ‘‘हम यह देखने जा रहे हैं कि शेष विश्व किसी एक शक्ति के वर्चस्व को कहीं से भी स्वीकार नहीं करेगा।’’
उन्होंने सिंगापुर से पीटीआई- को टेलीफोन पर दिये एक साक्षात्कार में कहा, ‘‘मुझे लगता है कि यहां महत्वपूर्ण बात यह है कि चीन ने एशिया में राष्ट्रवाद के स्वभाव का बुनियादी रूप से गलत आकलन किया है। एशिया में ज्यादातर देश राष्ट्रवादी हैं, भारत राष्ट्रवादी है। समूचे दक्षिण पूर्व एशिया में राष्ट्रवाद की मजबूत भावना है।’’
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