विदेश की खबरें | कनाडाई संसदीय समिति ने धोखाधड़ी के शिकार भारतीय छात्रों का निर्वासन रोकने का अनुरोध किया
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

टोरंटो, आठ जून कनाडा की एक संसदीय समिति ने आम सहमति से प्रस्ताव पारित कर अपनी सीमा सेवा एजेंसी से लगभग 700 भारतीय छात्रों के निर्वासन को रोकने को कहा है, जिन्हें भारत में बेइमान शिक्षा सलाहकारों ने धोखा दिया और ‘फर्जी कॉलेज प्रवेश पत्रों’ के साथ देश में भेज दिया।

कनाडा के अधिकारियों ने पाया कि शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के भारतीय छात्रों के पत्र फर्जी हैं जिसके बाद उन पर यहां से निर्वासन का खतरा है। इन भारतीय छात्रों में अधिकतर पंजाब के हैं।

मामला मार्च में प्रकाश में आया जब इन छात्रों ने कनाडा में स्थायी निवास के लिए आवेदन किया था।

‘द टोरंटो स्टार’ अखबार ने कहा कि सर्वदलीय आव्रजन समिति ने प्रतीकात्मक कदम के तौर पर बुधवार को आम-सहमति से मतदान किया और कनाडा सीमा सेवा एजेंसी से प्रभावित छात्रों की अमान्यता को रद्द करने की मांग की।

रिपोर्ट में कहा गया है कि समिति ने सीबीएसए को भारत से आए 700 से अधिक छात्रों को मानवीय आधार पर या ‘नियमितीकरण’ कार्यक्रम के माध्यम से स्थायी निवास का वैकल्पिक तरीका प्रदान करने को कहा।

सांसद जेनी क्वान ने छात्रों को धोखाधड़ी का शिकार बताते हुए प्रस्ताव रखा। प्रस्ताव में कहा गया है, ‘‘पहले कदम के तौर पर यह पूरी तरह आवश्यक है। छात्र धोखाधड़ी के शिकार हैं और उन्हें दंडित नहीं किया जाना चाहिए।’’

अखबार ने क्वान के हवाले से लिखा, ‘‘मैं इनमें से कई छात्रों से मिली हूं जो अब बुरी स्थिति में हैं। उन्होंने पैसा गंवाया और अब इस हालत में फंस गये हैं। इनमें से कुछ के खिलाफ निर्वासन का आदेश है। कुछ के मामले सीबीएसए में लंबित हैं।’’

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि भारत ने कनाडाई अधिकारियों के साथ इस मुद्दे को उठाया है।

उन्होंने नयी दिल्ली में कहा, ‘‘अगर ऐसे लोग हैं जो उन्हें (छात्रों को) गुमराह करते हैं तो दोषी पक्षों पर कार्रवाई की जानी चाहिए। नेक नियति से शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों को दंडित करना उचित नहीं है।’’

विदेश मंत्री ने कहा कि कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने हाउस ऑफ कामन्स में इस मुद्दे पर बयान दिया है।

जयशंकर ने कहा, ‘‘ हम इस मुद्दे पर कनाडा से सम्पर्क में हैं।’’

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