देश की खबरें | मुर्शिदाबाद हिंसा प्रभावित लोगों के शिविरों को निरूद्ध केंद्रों में तब्दील कर दिया गया है : अधिकारी

कोलकाता, 19 अप्रैल भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने शनिवार को आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल सरकार ने हिंसा प्रभावित लोगों के राहत शिविरों को ‘‘निरूद्ध’’ केंद्रों में तब्दील कर दिया है और प्रशासन बाहर से आने वाले किसी भी व्यक्ति को उनसे मिलने या उनकी दशा देखने की ‘‘अनुमति नहीं दे रहा’’ है।

राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस सरकार पर हिंसा प्रभावित लोगों के प्रति ‘‘अमानवीय’’ व्यवहार करने का भी आरोप लगाया।

बाद में, एल्गिन रोड स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस के आवास से भवानीपुर में श्यामा प्रसाद मुखर्जी रोड स्थित जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी के पैतृक घर तक भाजपा कार्यकर्ताओं एवं समर्थकों की एक रैली का नेतृत्व करते हुए अधिकारी ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस सरकार की ‘‘तुष्टीकरण नीति’’ बंगाल को एक और ‘‘बांग्लादेश’’ बना देगी और ‘‘हिंदू बंगालियों को उनके घरों से बाहर कर दिया जाएगा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘आप (बंगाली हिंदू) कभी तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में अपना सामान और संपत्ति छोड़कर यहां आकर बस गए थे। जब आपको फिर से अपने घरों से निकाल दिया जाएगा, यह तृणमूल कांग्रेस सरकार आपकी मदद के लिए नहीं आएगी।’’

नंदीग्राम से विधायक ने दावा किया कि 11 और 12 अप्रैल को वक्फ (संशोधन) अधिनियम के विरोध में मुर्शिदाबाद जिले के शमशेरगंज, धुलियान, सुती और जंगीपुर में उनकी (हिंदू समुदाय के लोगों की) संपत्तियों पर हुए हमलों के बाद समुदाय के कम से कम 10,000 लोग विस्थापित हुए हैं।

अधिकारी ने आरोप लगाया कि तृणमूल सरकार वोट बैंक के लिए सीमावर्ती जिलों के कुछ हिस्सों की सुरक्षा केंद्रीय बलों को सौंपने के खिलाफ है।

उन्होंने मांग की कि ‘‘मुर्शिदाबाद सहित सीमावर्ती जिलों के कुछ संवेदनशील इलाकों में बीएसएफ जैसे केंद्रीय बलों की निगरानी होनी चाहिए ताकि जिहादी तत्वों को खुली छूट न मिल सके।’’

उन्होंने कहा, ‘‘केंद्रीय एजेंसियों को न केवल दौरा करना चाहिए, बल्कि उनकी ओर से कार्रवाई भी होनी चाहिए।’’

‘‘सीमावर्ती जिलों में उत्पीड़न’’ का सामना करने वालों को हथियार रखने देने की वकालत करते हुए, अधिकारी ने कहा कि ‘‘हर किसी को आत्मरक्षा का अधिकार है।’’

बाद में, आईसीसीआर (भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद) में आयोजित प्रेस वार्ता में, उन्होंने मुर्शिदाबाद के हिंसा प्रभावित दो व्यक्तियों का परिचय दिया और घोषणा की कि भाजपा, अपने सहयोगी संगठनों के साथ, जिले में तोड़फोड़ किए गए घरों के पुनर्निर्माण में मदद करने के लिए संसाधन जुटाएगी।

प्रेस वार्ता में, राज्यसभा सदस्य स्वप्न दासगुप्ता भी मौजूद थे।

इससे पहले, शुभेंदु अधिकारी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में दावा किया कि लोगों, विशेष रूप से महिलाएं और बच्चे अपनी गरिमा की रक्षा के लिए धुलियान और शमशेरगंज में अपना घर-बार छोड़ने के लिए मजबूर हुए तथा भागीरथी नदी के पार वैष्णवनगर क्षेत्र में परलालपुर उच्च विद्यालय भवन और अन्य नजदीकी स्कूलों में शरण ली।

अधिकारी ने आरोप लगाया, ‘‘हालांकि, सरकार अपना अमानवीय चेहरा दिखा रही है और मीडिया तथा स्वयंसेवी संगठनों को विस्थापित लोगों से बातचीत करने की अनुमति नहीं दे रही है। उन्हें भोजन में घटिया किस्म का चावल परोसा जा रहा है। पुलिस विस्थापितों के लिए गैर सरकारी संगठनों द्वारा दान किये गए भोजन को स्थानीय गोदामों में जमा कर रही है।’’

उन्होंने यह भी दावा किया कि विस्थापितों की मदद के लिए आगे आए गैर सरकारी संगठनों के खिलाफ झूठे मामले बनाकर उनका उत्पीड़न किया जा रहा है।

नंदीग्राम से भाजपा विधायक ने कहा, ‘‘अपने घर-बार छोड़कर पलायन करने वाले लोगों के साथ ऐसा व्यवहार क्रूर, अमानवीय और लोकतांत्रिक सिद्धांतों के खिलाफ है।’’

अधिकारी ने धमकी दी कि यदि ‘‘मानवाधिकारों का ऐसा हनन जारी रहा तो’’ वह अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।

बहरामपुर से कांग्रेस के पूर्व सांसद अधीर चौधरी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार पीड़ित परिवारों की घर वापसी के लिए कोई व्यवस्था नहीं कर रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि मीडिया और विस्थापित लोगों के रिश्तेदारों एवं मित्रों को राहत शिविरों में उनसे मिलने की पुलिस ‘‘अनुमति नहीं दे रही’’ है।

तृणमूल कांग्रेस महासचिव कुणाल घोष ने कहा कि भाजपा जैसी विपक्षी पार्टियां राज्य को अस्थिर करने के लिए काम कर रही हैं और वे नहीं चाहते कि सामान्य स्थिति बहाल हो।

वक्फ अधिनियम में संशोधन के खिलाफ 11 और 12 अप्रैल को प्रदर्शन के दौरान भीड़ के हमले के बाद, लगभग 400 लोग, जिनमें ज्यादातर महिलाएं और बच्चे थे, धुलियान, शमशेरगंज स्थित अपना घर-बार छोड़कर मालदा के वैष्णवनगर चले गए थे।

मुस्लिम बहुल इलाकों में हुई सांप्रदायिक झड़पों में तीन लोग मारे गए और सैकड़ों अन्य बेघर हुए हैं।

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