बेंगलुरु, पांच मार्च कर्नाटक में विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने नक्सलियों के आत्मसमर्पण करने के तरीके पर बुधवार को सवाल उठाया। पार्टी ने आश्चर्य जताया कि मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के ‘एक्स’ पर नक्सिलयों से हथियार छोड़ने और मुख्यधारा में शामिल होने की अपील करने के कुछ ही दिनों के भीतर नक्सलियों ने कैसे आत्मसमर्पण कर दिया।
विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान भाजपा विधायक वी सुनील कुमार ने कहा कि नक्सलियों ने कई लोगों की हत्या की है और मलनाड एवं तटीय क्षेत्र के लोग डर के साये में जी रहे हैं।
पूर्व मंत्री कुमार ने कहा कि पुलिस ने कई तलाशी अभियान चलाए, लेकिन वह नक्सलियों का पता नहीं लगा पाई। उन्होंने कहा कि कई चेतावनियां भी नक्सलियों को रोक नहीं पाईं और उनसे आत्मसमर्पण नहीं करा पाईं।
भाजपा विधायक ने कहा कि लेकिन मुख्यमंत्री के एक ट्वीट के कुछ ही दिनों के भीतर नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया और राज्य को नक्सल मुक्त घोषित कर दिया गया।
कुमार ने सवाल किया, ‘‘हम नक्सलियों के आत्मसमर्पण का स्वागत करते हैं, लेकिन हमारी आपत्ति उस प्रक्रिया पर है, जिसका उचित तरीके से पालन नहीं किया गया। इसका क्या मतलब है कि आपके (मुख्यमंत्री के) ट्वीट करने के कुछ ही दिनों बाद वे (नक्सली) आपके कार्यालय में आकर आत्मसमर्पण कर देते हैं?’’
सोशल मीडिया पर सिद्धरमैया की अपील के एक सप्ताह बाद आठ जनवरी को छह नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया था।
कुमार ने कांग्रेस सरकार के इस दावे पर भी सवाल उठाया कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति गंभीर नहीं है। उन्होंने पूछा कि उदयगिरी थाने में हुए दंगों और बीदर एवं मंगलुरु में दिनदहाड़े हुई डकैती पर सरकार का क्या कहना है?
भाजपा विधायक ने कहा, ‘‘विधान परिषद के एक सदस्य ने कहा था कि वह राज्यपाल को उसी तरह भगा देंगे, जैसे प्रधानमंत्री शेख हसीना वाजेद बांग्लादेश से भागी थीं। क्या राज्य के सर्वोच्च पद के लिए यह धमकी प्रदेश की कानून-व्यवस्था की खराब स्थिति बताने के लिए पर्याप्त रूप से भड़काऊ नहीं थी?’’
वह डिसूजा द्वारा पिछले साल दिए गए बयान का हवाला दे रहे थे।
डिसूजा ने राज्यपाल थावर चंद गहलोत को चेतावनी दी थी कि एमयूडीए भूखंड आवंटन मामले में मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के खिलाफ जांच की मंजूरी देने पर उनका ‘बांग्लादेश जैसा हश्र’ होगा।
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