भाजपा को प्रधानमंत्री मोदी के केरल ‘लक्ष्य’ को हासिल करने की उम्मीद; वाम, कांग्रेस ने बताया ‘दिवास्वप्न’
करीब एक महीने पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केरल में सत्ता हासिल करने के अपने सपने की बात कही थी, जहां हमेशा से दो प्रमुख राजनीतिक गठबंधन का वर्चस्व रहा है. राज्य में एक गठजोड़ सत्ताधारी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्ट (माकपा) के नेतृत्व में है और दूसरा विपक्षी दल कांग्रेस के नेतृत्व में है. केरल की राजनीति मुख्य रूप से इन्हीं दोनों गठबंधन के इर्द-गिर्द घूमती रही है.
तिरुवनंतपुरम, 9 अप्रैल : करीब एक महीने पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने केरल में सत्ता हासिल करने के अपने सपने की बात कही थी, जहां हमेशा से दो प्रमुख राजनीतिक गठबंधन का वर्चस्व रहा है. राज्य में एक गठजोड़ सत्ताधारी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्ट (माकपा) के नेतृत्व में है और दूसरा विपक्षी दल कांग्रेस के नेतृत्व में है. केरल की राजनीति मुख्य रूप से इन्हीं दोनों गठबंधन के इर्द-गिर्द घूमती रही है. ईसाई बहुल राज्यों नगालैंड और मेघालय में चुनावों में भाजपा के प्रदर्शन से उत्साहित होकर प्रधानमंत्री मोदी ने दो मार्च को केरल को लेकर अपने सपने की बात की थी. चार हफ्ते बाद, भाजपा ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और केरल के पूर्व मुख्यमंत्री ए के एंटनी के बेटे अनिल के एंटनी को अपने पाले में लाकर राज्य में अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को चौंका दिया.
एंटनी को दक्षिणी राज्य में अपने प्रमुख अल्पसंख्यक चेहरों में से एक के रूप में प्रस्तुत करते हुए, भाजपा अब कह रही है कि ईसाई और मुस्लिम समुदायों के कई लोग आगामी दिनों में पार्टी में शामिल होंगे क्योंकि केरल में राजनीतिक परिदृश्य नाटकीय रूप से बदल गया है. हालांकि, माकपा और कांग्रेस ने इसका प्रतिकार करते हुए कहा कि मोदी के केरल में सत्ता हासिल करने के सपने हमेशा के लिए अधूरे रहेंगे. प्रधानमंत्री द्वारा निर्धारित लक्ष्यों के करीब पहुंचने के लिए, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अच्छी तरह जानती है कि उसे उत्तर भारत के राज्यों के विपरीत केरल में एक अलग दृष्टिकोण अपनाना होगा. अल्पसंख्यकों पर ध्यान केंद्रित करने के अलावा अनुसूचित जाति (एससी) /अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में पार्टी को पैठ बनानी होगी. यह भी पढ़ें : कांग्रेस ने बी. एन. चंद्रप्पा को कर्नाटक इकाई का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया
चुनाव विश्लेषक और केरल विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर डॉ सज्जाद इब्राहिम ने कहा, ‘‘भाजपा चुनाव दर चुनाव केरल में आगे बढ़ रही है.’’ साथ ही उन्होंने कहा कि केरल में मतदाताओं की लगभग आधी संख्या अल्पसंख्यकों से संबंधित हैं, जिसमें पैठ बनाने के लिए भाजपा को कड़ी मशक्कत करनी होगी. हालांकि, केरल विधानसभा या राज्य से लोकसभा में एक भी सीट नहीं होने के बावजूद, भाजपा दक्षिणी राज्य में दो नगर पालिकाओं और 19 ग्राम पंचायतों पर शासन कर रही है. भाजपा की केरल इकाई के महासचिव जॉर्ज कुरियन ने ‘पीटीआई-’ से कहा, ‘‘केरल में राजनीतिक परिदृश्य नाटकीय रूप से बदल गया है. हमने देखा कि ए के एंटनी के पुत्र अनिल एंटनी भाजपा में शामिल हो गए. काफी लोग भाजपा में शामिल होने के लिए तैयार हैं. इनमें अल्पसंख्यक समुदायों के लोग भी हैं.’’
(The above story first appeared on LatestLY on Apr 09, 2023 04:20 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

