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देश की खबरें | बिलकिस मामले के दोषियों के सिर पर मुसलमानों को मारने के लिए “खून सवार” था : बिलकिस की वकील

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय को सोमवार को बताया गया कि बिलकिस बानो सामूहिक दुष्कर्म मामले और 2002 के गुजरात दंगों के दौरान उसके परिवार के सात सदस्यों की हत्या के दोषियों के सिर पर मुसलमानों को शिकार बनाने और उन्हें मारने के लिए “खून सवार” था।

देश की खबरें | बिलकिस मामले के दोषियों के सिर पर मुसलमानों को मारने के लिए “खून सवार” था : बिलकिस की वकील

नयी दिल्ली, सात अगस्त उच्चतम न्यायालय को सोमवार को बताया गया कि बिलकिस बानो सामूहिक दुष्कर्म मामले और 2002 के गुजरात दंगों के दौरान उसके परिवार के सात सदस्यों की हत्या के दोषियों के सिर पर मुसलमानों को शिकार बनाने और उन्हें मारने के लिए “खून सवार” था।

बिलकिस बानो की ओर से पेश वकील शोभा गुप्ता ने सभी 11 दोषियों को पिछले साल दी गई सजा में छूट को चुनौती देने वाली याचिका पर बहस शुरू करते हुए कहा कि जब वह (बिलकिस) गर्भवती थीं तो उनके साथ क्रूरतापूर्वक सामूहिक बलात्कार किया गया था और उनके पहले बच्चे को पत्थर से कुचलकर मार डाला गया था।

गुप्ता ने न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ को बताया, “वह उन सभी को जानती थी इसलिए गुहार लगाती रही कि वह उनकी बहन की तरह है। वे आसपास के इलाके से थे...यह अचानक हुई घटना नहीं थी। मुसलमानों को शिकार बनाने और उन्हें मारने के लिए उनके सिर पर खून सवार था और वे उसी इरादे से बिलकिस का पीछा कर रहे थे। उन्होंने नारे लगाए- ये मुसलमान हैं, इन्हें मार डालो। उच्च न्यायालय ने इस बात पर ध्यान दिया था कि उनके द्वारा किया गया अपराध दुर्लभ, असामान्य और सांप्रदायिक घृणा से प्रेरित था।”

वकील ने अदालत को बताया कि दोषियों को सजा में छूट के बाद 15 अगस्त, 2022 को रिहा कर दिया गया था और बिलकिस को इसके बारे में तब पता चला जब उन्होंने जेल से बाहर आते ही जश्न मनाया।

दोषियों को दी गई छूट का विरोध करते हुए गुप्ता ने कहा कि सीबीआई ने दोषियों की समय से पहले रिहाई का विरोध करते हुए कहा था कि बड़े पैमाने पर समाज में गलत संदेश जाएगा, क्योंकि अपराध इस तरह का है कि इसे माफ नहीं किया जा सकता है।

इस मामले में सुनवाई मंगलवार को भी जारी रहेगी।

शीर्ष अदालत ने मामले में सभी 11 दोषियों को पिछले साल दी गई सजा में छूट को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई शुरू करने के लिए सात अगस्त की तारीख तय की थी।

शीर्ष अदालत ने नौ मई को उन दोषियों के खिलाफ गुजराती और अंग्रेजी सहित स्थानीय समाचार पत्रों में नोटिस प्रकाशित करने का निर्देश दिया था, जिन्हें नोटिस तामील नहीं हो सका था।

पीठ ने दो मई को सुनवाई तब टाल दी थी जब दोषियों के कुछ वकीलों ने उन्हें दी गई छूट को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर नोटिस नहीं दिए जाने पर आपत्ति जताई थी।

केंद्र और गुजरात सरकार ने अदालत को बताया था कि वे अदालत के 27 मार्च के आदेश की समीक्षा के लिए कोई याचिका दायर नहीं कर रहे हैं, जिसमें दोषियों को दी गई छूट के संबंध में मूल रिकॉर्ड पेश करने को कहा गया है।

गुजरात सरकार ने बिलकिस बानो की याचिका के अलावा इस मामले में दायर अन्य याचिकाओं के संबंध में प्रारंभिक आपत्तियां उठाई थीं और कहा था कि इसके व्यापक प्रभाव होंगे, क्योंकि समय-समय पर तीसरे पक्ष आपराधिक मामलों में अदालतों का दरवाजा खटखटाएंगे।

बिलकिस बानो की याचिका के अलावा, माकपा नेता सुभाषिनी अली, स्वतंत्र पत्रकार रेवती लॉल, लखनऊ विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति रूप रेखा वर्मा सहित कई अन्य ने जनहित याचिकाएं दायर कर सजा में छूट को चुनौती दी है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद महुआ मोइत्रा ने भी छूट के खिलाफ जनहित याचिका दायर की है।

बिलकिस बानो उस वक्त 21 साल की थी और पांच महीने की गर्भवती थी, जब गोधरा ट्रेन जलाने की घटना के बाद भड़के सांप्रदायिक दंगों के डर से भागते समय उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया था। उसकी तीन साल की बेटी दंगों में मारे गए परिवार के सात सदस्यों में से एक थी।

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(The above story first appeared on LatestLY on Aug 07, 2023 09:58 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).