यह स्थानांतरण अंतरराष्ट्रीय संधि से इतर होगा और इसके लिये दोनों देशों के कानून में बदलाव की जरूरत होगी। यह विचार देने वाले हालांकि मानते हैं कि ऑस्ट्रेलिया को ब्रेंटन हैरिसन टर्रेंट को कैद में रखने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए और न्यूजीलैंड वासियों को उस पर होने वाले खर्च से मुक्ति देनी चाहिए।
क्राइस्टचर्च में मार्च 2019 में किये गए हमले के लिये टर्रेंट (29) को बृहस्पतिवार को बिना पेरोल आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। वह न्यूजीलैंड में सजा पाया ऐसा पहला व्यक्ति है जिसकी पेरोल की संभावना खत्म कर दी गई है और जेल में उसकी सुरक्षा के लिहाज से चौकसी बढ़ा दी गई है। टर्रेंट मानता है कि श्वेत दुनिया की सर्वश्रेष्ठ नस्ल है।
प्रधानमंत्री स्कॉट मोरिसन ने कहा कि न्यूजीलैंड ने कोई आधिकारिक अनुरोध नहीं किया है लेकिन ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने उसे वापस लेने का विकल्प खुला रखा है।
मोरिसन ने कहा, “मैं खुश हूं कि आतंकवादी को कहीं भी दुबारा कभी रिहा नहीं किया जाएगा। हम इस पर खुली चर्चा करेंगे और इससे संबंधित मुद्दों को भी देखेंगे।”
उन्होंने कहा, “सबसे ज्यादा, हम इस बात को लेकर संवेदनशील हैं कि प्रभावित लोगों के परिवार का क्या नजरिया है, और हम सही चीज करना चाहते हैं।”
न्यूजीलैंड के उप प्रधानमंत्री विंस्टन पीटर्स हत्यारे को ऑस्ट्रेलिया भेजे जाने के सबसे मुखर पक्षधर हैं।
टर्रेंट नरसंहार के वक्त न्यूजीलैंड का वैध नागरिक था और अपराधियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के तहत अपराधी को उस न्यायक्षेत्र में सजा काटनी होती है जहां अपराध किया गया होता है।
एपी
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