नयी दिल्ली, आठ मई केंद्र ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय को भरोसा दिलाया कि पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों के रंग-रूप को लेकर और उन्हें गलती से चीनी समझ कर उनसे नस्ली भेदभाव तथा उत्पीड़न किये जाने की घटनाओं से निपटने के लिये उपयुक्त कदम उठाये जाएंगे।
एक मानवाधिकार कार्यकर्ता ने शीर्ष न्यायालय का रुख कर देश के विभिन्न हिस्सों में पूर्वोत्तर के लोगों पर थूके जाने, उन्हें मकान से निकालने, उन्हें नौकरी से बर्खास्त करने, उन्हें अस्पतालों में कोविड-19 रोगियों के साथ पृथक करने और उन पर नस्ली टिप्पणी करने जैसे कथित नस्ली हमलों का जिक्र किया।
न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति बी आर गवई की पीठ ने वीडियो कांफ्रेंस के जरिये इस विषय की सुनवाई की।
पीठ ने केंद्र की ओर से पेश हुए सॉलीसीटर जनरल तुषार मेहता का बयान दर्ज करने के बाद विषय का निपटारा कर दिया।
मेहता ने न्यायालय से कहा कि केंद्र सरकार तत्काल ही इस इस बारे में उपयुक्त कदम उठाएगी।
याचिकाकर्ता अलना गोलमेई की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कोलिन गोंजाल्वेस ने पूर्वोत्तर के लोगों के साथ नस्ली भेदभाव और उन पर हुए हमलों से जुड़ी विभिन्न खबरों का जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर के लोग इस तरह की घटनाओं के चलते भेदभाव का सामना कर रहे हैं और केंद्र को आशंकाओं को दूर करने के लिये तत्काल ही कदम उठाना चाहिए।
दलीलों पर संज्ञान लेते हुए पीठ ने कहा, ‘‘...सॉलीसीटर जनरल ने दलील दी है कि रिट याचिका में जिस बात का जिक्र किया गया है उस पर ध्यान दिया जाएगा और सरकार रिट याचिका में याचिकाकर्ताओं द्वारा जाहिर की गई आशंकाओं को दूर करने के लिये तत्काल आधार पर उपयुक्त कदम उठाएगी। सॉलीसीटर जनरल के बयान पर गौर करते हुए याचिका का निपटारा किया जाता है।’’
यह याचिका अधिवक्ता सत्य मित्र के मार्फत दायर की गई थी।
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