जरुरी जानकारी | हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए अमेरिकी, साथी देशों में रक्षा प्रौद्योगिकी पर बड़े तालमेल की जरूरत:लाल

वाशिंगटन, 22 जुलाई भारतीय-अमेरिकी कार्यकारी अधिकारियों के मंच से जुड़े अमेरिकी रक्षा उत्पादन क्षेत्र के एक शीर्ष कार्यकारी ने विवेक लाल ने कहा है कि एक मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए अमेरिका और उसके साथी देशों के बीच सामूहिक रक्षा औद्योगिक केंद्रों के साथ एक ‘‘अभूतपूर्व तालमेल’’ की आवश्यकता होगी।

इससे उनके साजो सामान की प्रौद्योगिकी जल्दी पुरानी नहीं पड़ेगी।

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अमेरिका-भारत व्यापार परिषद (यूएसआईबीसी) द्वारा आयोजित ‘इंडिया आइडियाज समिट’ में जनरल एटॉमिक्स ग्लोबल कॉरपोरेशन के मुख्य कार्यकारी लाल ने कहा कि वैश्विक रक्षा उद्योग नयी नयी तकनीकों को तेजी से अपना रहा है और ऐसे में चलन से बाहर होने के नुकसान से बचने के लिए सरकारों और उद्योग के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखलाएं स्थानांतरित हों या न हों, लेकिन एशिया हमेशा वैश्विक व्यापार के केंद्र में रहेगा।

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जकार्ता में जन्मे रक्षा विशेषज्ञ ने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में ज्यादातर आर्थिक संकेतक व्यापार के प्रवाह, शुद्ध निवेश प्रवाह और वास्तविक जीडीपी वृद्धि को प्रोत्साहित करते रहेंगे, जो मानव विकास और महामारी के बाद सुधार के लिए जरूरी है।

दुनिया का लगभग दो-तिहाई तेल लदान हिंद महासागर से प्रशांत महासागर होकर जाता है। दुनिया के 10 सबसे व्यस्त कंटेनर बंदरगाहों में आठ इस क्षेत्र में हैं। वैश्विक व्यापार का तीस प्रतिशत हिस्सा दक्षिण चीन सागर से होकर जाता है, जिसमें से हर साल 1200 अरब डॉलर की खेप सिर्फ अमेरिका को जाती है।

अमेरिकी रक्षा उद्योग की प्रमुख हस्ति लाल ने कहा, ‘‘इन सब की सुरक्षा करना पूरे क्षेत्र और विशेष रूप से समुद्री क्षेत्र की सुरक्षा पर निर्भर करता है।’’

लाल ने कहा कि यह उत्साहजनक है कि अमेरिकी सरकार और उसके साथ देश पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र के जोखिमों को पहचानते हैं और रक्षा प्रौद्योगिकी के विकास में निवेश करने के लिए तत्पर हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘हम देख रहे हैं कि इस क्षेत्र के देश समझ रहे हैं कि क्या दांव पर है और वे उसके अनुसार जवाब दे रहे हैं, जापान से लेकर कोरिया तक, ताइवान से ऑस्ट्रेलिया तक, और निश्चित रूप से भारत भी। इसमें एक उद्योग के रूप में हमारी सार्थक भूमिका है।’’

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