नयी दिल्ली, 10 जून जाने माने हृदय रोग विशेषज्ञ और मेदांता अस्पताल के प्रवर्तक डॉ. नरेश त्रेहन ने बुधवार को कहा कि गुंडगांव में अस्पताल को जमीन आवंटन में कथित अनियमितता से जुड़ी ईडी की जांच में वह सहयोग करेंगे ।
एक बयान में त्रेहन ने अस्पताल बनाने के लिए 16 साल पहले जमीन आवंटन के संबंध में लगाए गए आरोपों से इनकार किया है।
त्रेहन (73) मेदांता हार्ट इंस्टीट्यूट के सीएमडी और ग्लोबल हेल्थ प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक भी हैं ।
त्रेहन ने कहा, ‘‘इस जमीन आवंटन से जुड़ी हर चीज वैध है। सार्वजनिक नीलामी से आवंटन हुआ था। शिकायत में बेतुके आरोप लगाए गए हैं । हमने दुनिया के इस हिस्से में सबसे बेहतरीन अस्पताल बनाया है और हमने जो काम किया है, उस पर हमें नाज है। ’’
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उन्होंने मामले में शिकायतकर्ता रमण शर्मा पर प्रताड़ित करने का भी आरोप लगाया ।
उन्होंने कहा, ‘‘रमण शर्मा की शिकायत और कुछ नहीं बल्कि एक तरह की प्रताड़ना है। उन्होंने ऐसे समय में शिकायत दी है जब हम वैश्विक महामारी का मुकाबला कर रहे हैं।’’
त्रेहन ने कहा, ‘‘70 वर्ष से अधिक उम्र होने के बावजूद इस महामारी के समय भी मैं अपने मरीजों को देखता हूं और मुझ पर भी खतरा रहता है। यह बहुत चिंता की बात है कि लोगों के मिथ्या आरोपों से डॉक्टरों और अस्पतालों को प्रताड़ित होना पड़ रहा है । यह बहुत चिंता की बात है और इससे बहुत चोट पहुंची है।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि ‘‘शर्मा आरटीआई कार्यकर्ता के नाम पर धन की उगाही के लिए जाने जाते हैं।’’
त्रेहन ने आरोप लगाया, ‘‘उन्होंने (शर्मा) पूरी तरह झूठे और निराधार आरोप लगाए हैं । एक चीज जिसको नजरअंदाज किया जा रहा कि शर्मा ने पहले भी दो मामले दर्ज कराए थे। एक पटियाला हाउस अदालत में और एक दिल्ली उच्च न्यायालय के सामने, जिसे खारिज कर दिया गया था। समूची शिकायत में पर्याप्त जानकारी भी नहीं दी गयी।’’
डॉ. त्रेहन ने आरोप लगाया कि दिल्ली की अदालतों में नाकामी के बाद शर्मा ने गुड़गांव में जिला अदालत का रुख किया जहां उन्होंने इसका खुलासा नहीं किया कि ईडी के संज्ञान में आर्थिक अपराध शाखा ने पूरी तरह जांच की थी और पूरी जांच के बाद आरोपों को निराधार पाया गया था।
उन्होंने कहा, ‘‘अपने पक्ष में आदेश देने के लिए उन्होंने अदालत को किस तरह भ्रमित किया, यह देखा जा सकता है । इसी अदालत के आदेश के बाद अब ईडी द्वारा की जांच की जा रही है।’’
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