वालस्ट्रीट जर्नल ने बिना पहचान जाहिर किए इस घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले सूत्रों के माध्यम से यह रपट छापी है।
रपट के मुताबिक ऐप की यह एल्गोरिद्म तय करती है कि कोई उपयोक्ता किसी अन्य उपयोक्ता को फॉलो किए या अपनी वरीयता का चुनाव किए बगैर कौन सा वीडियो देखेगा। शुक्रवार तक इस एल्गोरिद्म को सौदे का हिस्सा माना जा रहा था।
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तभी चीन की सरकार ने कृत्रिम मेधा प्रौद्योगिकी से जुड़े निर्यातों पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की। इसके दायरे में टिकटॉक की एल्गोरिद्म भी आ गयी है जो उसकी सबसे बड़ी ताकतों में से एक है।
चीन का यह कदम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टिकटॉक के अमेरिकी परिचालन को 20 सितंबर तक बेचने की कोशिशों के जवाब में उठाया गया लगता है।
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इस निर्यात प्रतिबंध के चलते टिकटॉक की चीनी मालिक कंपनी बाइटडांस लिमिटेड को किसी विदेशी कंपनी को प्रतिबंधित प्रौद्योगिकी का निर्यात करने के लिए लाइसेंस लेना होगा। अब सवाल यह है कि क्या इस एल्गोरिद्म को किसी और को देने के लिए चीन की सरकार से अनुमति लेनी होगी और यदि ऐसा है तो क्या चीनी सरकार इसकी अनुमति देगी।
जर्नल ने अपनी रपट में कहा कि इस बारे में संभावित खरीदार और बिकवाल कंपनी दोनों समाधान निकालने का प्रयास कर रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि माइक्रोसॉफ्ट-वालमार्ट और ओरेकल इत्यादि टिकटॉक के अमेरिकी परिचालन के संभावित खरीदार हैं।
इस बारे में मंगलवार को भेजे सवालों पर टिकटॉक की कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। माइक्रोसॉफ्ट, ओरेकल और वालमार्ट ने भी टिप्पणी करने से मनाकर दिया।
एपी
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