तिरुवनंतपुरम, 22 अगस्त केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता रमेश चेन्निथला ने शनिवार को एलडीएफ सरकार से तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डे के निजीकरण के लिए राज्य की बोली प्रक्रिया में अडाणी समूह की करीबी कंपनी की कथित संलिप्तता पर सफाई मांगी।
माकपा की अगुवाई वाली राज्य सरकार और विपक्षी कांग्रेस पार्टी ने तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डे को पीपीपी के जरिए 50 साल के लिए पट्टे पर अडाणी एंटरप्राइजेज को देने के केंद्रीय मंत्रिमंडल के फैसले का विरोध किया है।
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चेन्निथला ने एक बयान में कहा, ‘‘खबर है कि राज्य सरकार ने बोली प्रक्रिया के लिए सिरिल अमरचंद मंगलदास से कानूनी सलाह ली थी, जो अडाणी के करीबी रिश्तेदार के स्वामित्व वाली फर्म है। यदि यह सही है, इससे राज्य सरकार और अडाणी समूह के बीच सांठगांठ का पता चलता है।’’
केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने तीन और हवाई अड्डों जयपुर, गुवाहाटी और तिरुवनंतपुरम को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के माध्यम से पट्टे पर देने के प्रस्ताव को बुधवार को मंजूरी दी थी।
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इससे पहले केरल की सत्तारूढ़ पार्टी माकपा ने भी बृहस्पतिवार को सभी दलों की एक बैठक बुला तिरुवंनतपुरम हवाईअड्डे के निजीकरण के केन्द्रीय मंत्रिमंडल के फैसले को वापस लिए जाने की मांग की थी।
अडाणी समूह राज्य सरकार के साथ हवाई अड्डे के लिए प्रमुख बोलीदाताओं में से एक था।
विपक्ष के नेता ने कहा कि तथ्य यह है कि एक ही फर्म ने राज्य और अडाणी समूह दोनों को कानूनी सलाह दी, और बाद में सफल बोली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए।
उन्होंने कहा कि एलडीएफ सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि इस विरोधाभाष के बावजूद उनकी सेवाएं कैसे ली गईं।
इस बीच, भाजपा की राज्य इकाई ने कहा कि राज्य सरकार हवाई अड्डे के लिए अडाणी समूह का विरोध कर रही है, लेकिन कानूनी मदद के लिए उनके पक्ष में थी।
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