देश की खबरें | 'संथारा' के बाद तीन वर्षीय लड़की की मौत का मामला मप्र उच्च न्यायालय पहुंचा

इंदौर, 17 जून इंदौर में ब्रेन ट्यूमर से जूझ रही तीन वर्षीय लड़की को ‘संथारा’ व्रत ग्रहण कराए जाने के बाद उसकी मौत को लेकर सवाल उठाते हुए मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गई है।

अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बगैर निर्देश दिया है कि इस याचिका के प्रतिवादियों में लड़की के माता-पिता को शामिल किया जाए। याचिका में केंद्र और राज्य सरकार के साथ ही राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग पहले से प्रतिवादी हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता प्रांशु जैन (23) की ओर से दायर की गयी याचिका में गुहार की गई है कि नाबालिग बच्चों और मानसिक रूप से अस्वस्थ लोगों को ‘संथारा’ व्रत ग्रहण कराए जाने की प्रक्रिया पर कानूनी रोक लगाए जाए क्योंकि इस प्रक्रिया के कारण संबंधित व्यक्ति के जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन होता है।

'संथारा' जैन धर्म की प्राचीन प्रथा है जिसका पालन करने वाला व्यक्ति स्वेच्छा से अन्न-जल, दवाएं और अन्य सांसारिक वस्तुएं छोड़कर प्राण त्यागने का फैसला करता है।

जनहित याचिका में कहा गया है कि ‘संथारा’ की प्रक्रिया शुरू किए जाने से पहले यह व्रत लेने वाले व्यक्ति की सहमति की आवश्यकता होती है, लेकिन ब्रेन ट्यूमर से जूझ रही तीन साल की अबोध बच्ची को कथित तौर पर जबरन यह व्रत दिला दिया गया।

याचिका में यह भी कहा गया है कि बच्ची की मृत्यु के बाद उसके माता-पिता के आवेदन पर गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने लड़की के नाम विश्व कीर्तिमान का 'उत्कृष्टता प्रमाण पत्र' जारी किया जिसमें उसे "जैन विधि-विधान के मुताबिक संथारा व्रत ग्रहण करने वाली दुनिया की सबसे कम उम्र की शख्स" बताया गया है।

याचिकाकर्ता के वकील शुभम शर्मा ने ‘पीटीआई-’ को बताया,‘‘उच्च न्यायालय ने सोमवार को हमें निर्देश दिया कि संथारा व्रत दिलाए जाने के बाद दम तोड़ने वाली लड़की के माता-पिता को जनहित याचिका के प्रतिवादियों की सूची में शामिल किया जाए ताकि गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के इस प्रमाण पत्र के बारे में पुष्टि की जा सके।’’

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