6 फरवरी से इटली में होने वाले 25वें शीतकालीन ओलंपिक में करीब 2,900 एथलीट हिस्सा ले रहे हैं. इनमें 47 फीसदी महिलाएं हैं., लेकिन भारत की ओर से केवल दो पुरुष एथलीट ही जगह बना पाए हैं.इटली के मिलान और कोर्टिना द'म्पेजो में 25वें शीतकालीन ओलंपिक का 6 फरवरी को उद्घाटन होगा. कोर्टिना द'म्पेजो दूसरी बार शीतकालीन ओलंपिक की मेजबानी कर रहा है. इससे पहले 1956 में इटली के डोलोमाइट्स स्थित इसी विंटर स्पोर्ट्स रिसॉर्ट में सातवें शीतकालीन खेल आयोजित हुए थे. मिलानो-कोर्टिना 2026 इटली के लिए तीसरे शीतकालीन और कुल मिलाकर चौथे ओलंपिक होंगे.
यह अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) की अध्यक्ष, किर्स्टी कोवेंट्री के नेत्तृत्व में पहला ओलंपिक है. 2025 में वह आईओसी के 130 साल से भी लंबे इतिहास में पहली महिला और पहली अफ्रीकी अध्यक्ष चुनी बनीं.
पूर्व ओलंपिक तैराक रही 42 वर्षीय कोवेंट्री कहती हैं, "मुझे लगता है कि ओलंपिक खेल सिर्फ शानदार खेल के पलों को दिखाने का मंच नहीं हैं, बल्कि यह हमें याद दिलाने का भी एक बेहद सशक्त जरिया हैं कि इंसान के तौर पर हमें कैसा व्यवहार करना चाहिए और हमारे मानवीय मूल्य क्या होने चाहिए. कई बार सबसे असरदार संदेश बहुत साधारण होते हैं और शायद वही सबसे मजबूत भी होते हैं.”
स्की माउंटेनियरिंग पहली बार ओलंपिक खेलों का हिस्सा
खेलों का औपचारिक उद्घाटन 6 फरवरी को मिलान के ज्यूसेपे मेआत्सा स्टेडियम (सान सिरो) में होगा, जहां आमतौर पर इंटर और एसी मिलान फुटबॉल क्लब खेलते हैं. 75,000 दर्शकों की क्षमता वाले इस स्टेडियम में समारोह होगा, जबकि प्रतियोगिताएं दो दिन पहले, 4 फरवरी से ही कर्लिंग खेल के साथ शुरू हो गई थीं.
इस साल स्की माउंटेनियरिंग को पहली बार ओलंपिक खेल के रूप में शामिल किया जा रहा है. इसमें एथलीट चढ़ाई के दौरान स्की के नीचे विशेष ‘स्किन' लगाकर फिसलन से बचते हैं और शिखर पर पहुंचकर उन्हें हटाकर नीचे उतरते हैं.
इस बार ओलंपिक चार मुख्य क्लस्टर में आयोजित हो रहे हैं. मिलान में उद्घाटन समारोह, फिगर स्केटिंग, स्पीड स्केटिंग और आइस हॉकी, वाल्टेलिना में फ्रीस्टाइल स्कीइंग, स्नोबोर्डिंग और स्की माउंटेनियरिंग, कोर्टिना द'अम्पेजो और आंतर्सेल्वा में महिला अल्पाइन स्कीइंग, कर्लिंग और बायथलॉन, जबकि वाल दी फिएम्मे में स्की जंपिंग और क्रॉस-कंट्री स्कीइंग आयोजित होंगे.
47 फीसदी महिलाओं में एक भी भारतीय महिला नहीं
इस साल करीब 90 से अधिक देशों के लगभग 2,900 खिलाड़ी 116 पदकों के लिए मुकाबला करेंगे, जिसमें करीब 47 प्रतिशत महिलाएं हैं. जर्मनी 188 खिलाड़ियों के साथ अपना अब तक का सबसे बड़ा दल भेज रहा है. वहीं, 29 जनवरी 2026 तक की जानकारी के अनुसार, रूस के 13 और बेलारूस के 7 खिलाड़ी भी हिस्सा लेंगे.
भारत से दो एथलीट विंटर ओलंपिक में भाग लेने के लिए इटली पहुंचे हैं. एक हैं आरिफ खान, जो अल्पाइन स्कीइंग में हिस्सा लेंगे और दूसरे हैं, स्तांजिन लुंदुप, जो क्रॉस-कंट्री स्कीइंग में हिस्सा लेंगे.
कैसा रहा है एल्पाइन स्कीईंग करने जा रहे आरिफ खान का सफर
जम्मू-कश्मीर के गुलमर्ग के पास छोटे से गांव गोइवारा से आने वाले आरिफ मोहम्मद खान ने ऐसे इलाके में बचपन बिताया, जहां हिंसा रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा था. अरिफ कहते हैं, "जब हम बच्चे थे, फुटबॉल और क्रिकेट खेलते थे, लेकिन आसपास कोई मैदान नहीं था. इसलिए स्कीइंग ही हमारे लिए सबसे आसान खेल था.”
बीजिंग 2022 शीतकालीन ओलंपिक में आरिफ खान भारत से इकलौते खिलाड़ी थे. लगातार दो अलग-अलग विंटर ओलंपिक स्पर्धाओं में सीधे कोटा हासिल करने वाले वह पहले भारतीय बन गए हैं. जायंट स्लालम के बाद उन्होंने कहा, "शीतकालीन ओलंपिक में पहुंचना मेरा सपना था. यह मेरे लिए बहुत मायने रखता है और यह हमारे देश के लोगों के लिए एक संदेश है कि वे भविष्य में विंटर स्पोर्ट्स से जुड़ें.”
आरिफ खान के पिता यासीन खान गुलमर्ग में स्की उपकरणों की दुकान चलाते हैं, इसलिए अरिफ बहुत छोटी उम्र से ही इस खेल के करीब रहे. वह चार साल की उम्र से स्कीइंग कर रहे हैं. 1994 को याद करते हुए उन्होंने 'द हिंदू' से कहा, "हमें करीब 500 मीटर पैदल चलकर दुकान तक जाना पड़ता था. चारों ओर मोटी बर्फ होती थी. मेरे पिता ने दुकान के बाहर ही एक छोटा स्की ढलान तैयार किया था. हम सुबह करीब 9:30 बजे शुरू करते और घंटों अभ्यास करते थे.”
खान ने 12 साल की उम्र में राष्ट्रीय चैंपियनशिप में पहली ही बार में स्वर्ण पदक जीत लिया था. जबकि 16 साल की उम्र में उन्होंने अपना अंतरराष्ट्रीय सफर शुरू कर दिया था.
यह एक महंगा खेल है. इसलिए खान के करियर का खर्च उनके पिता ने उठाया. आर्थिक कमी पूरी करने के लिए आरिफ कई बार स्कीइंग इंस्ट्रक्टर और कोच के रूप में भी काम करते रहे. 2018 में प्योंगचांग ओलंपिक से पहले उन्हें क्राउडफंडिंग का भी सहारा लेना पड़ा था. क्राउडफंडिंग साइट पर उन्होंने जानकारी दी है कि 2026 के ओलंपिक के लिए उन्हें कुल 50 लाख रूपये की जरूरत है. जिसमें से 12 लाख बेहतर ट्रेनिंग का खर्च है, 10 लाख अलग-अलग प्रतिस्पर्धाओं में भाग लेने का खर्च है, जबकि 7 लाख अच्छी गुणवत्ता वाले उपकरणों का खर्च है.
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वह कहते हैं, "बेहतर अनुभव और ज्यादा प्रतियोगिताओं के लिए विदेश जाना जरूरी था, लेकिन आर्थिक सहयोग इतना नहीं था. अगर एक खिलाड़ी के तौर पर मुझे वह समर्थन मिलता, तो मैं उन देशों में समय से पहले ट्रेनिंग शुरू करता, जहां बर्फ होती है, और मुख्य सीजन शुरू होने से पहले ही प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेता.”
उन्होंने आगे कहा, "इसके अलावा, सही समय पर बेहतर उपकरण खरीद पाता, अच्छे कोच को समय रहते नियुक्त कर पाता, स्की लिफ्ट्स और ढलानों तक नियमित पहुंच होती, फिजियो और दूसरी जरूरी सुविधाएं भी मिलती. यह सब बहुत बड़ा फर्क पैदा करता है, कम या बिल्कुल भी समर्थन न होने की तुलना में पूरा सहयोग मिलने से खिलाड़ी का स्तर कहीं ज्यादा ऊंचा हो सकता है.”
साथ ही, वह भारत को पहाड़ों और बर्फ वाले देश के रूप में दुनिया के सामने पेश करना चाहते हैं. वह कहते हैं, "जब लोग सुनते हैं कि मैं भारत से हूं और स्कीइंग करता हूं, तो वे हैरान हो जाते हैं. उन्हें लगता है कि भारत में बर्फ ही नहीं है, मैं कहता हूं, यह गलत है. हमारे पास हिमालय और पीर पंजाल जैसी पर्वत श्रृंखलाएं हैं, जहां कई मीटर तक बर्फ पड़ती है.”
क्रॉस-कंट्री स्कीयर स्तांजिन लुंदुप का ओलंपिक 2026 तक का सफर
स्तांजिन लुंदुप, भारतीय क्रॉस-कंट्री स्कीयर हैं, जो लद्दाख से आते हैं. 29 वर्षीय लुंदुप भारतीय सेना में सेवारत हैं और 2017 से अपने खर्चे पर क्रॉस-कंट्री स्कीइंग प्रतिस्पर्धा में भाग ले रहे हैं.
लुंदुप ने नॉर्वे में आयोजित एफआईएस नॉर्डिक वर्ल्ड स्की चैंपियनशिप में अपने प्रदर्शन के आधार पर मिलानो-कोर्टिना 2026 शीतकालीन ओलंपिक के लिए क्वालिफाई किया था. इस प्रतियोगिता में वह क्रॉस-कंट्री स्कीइंग में भारत के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी थे. उनके 269.58 एफआईएस पॉइंट्स ने ओलंपिक चयन के लिए निर्धारित योग्यता मानकों को पूरा किया और उनका ओलंपिक तक का सफर मुमकिन बनाया.
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हालांकि, 2026 ओलंपिक में उनकी भागीदारी उस समय अनिश्चित हो गई, जब उनके साथ के एक अन्य स्कीयर मनजीत ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की. कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को मनजीत को शामिल करने का निर्देश दिया, लेकिन बाद में अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने मनजीत को शामिल करने के अनुरोध को खारिज कर दिया. हालांकि, समीति ने स्पष्ट किया कि भारत की ओलंपिक भागीदारी पर कोई खतरा नहीं है, जिससे यह तय हो गया कि स्तांजिन लुंदुप 2026 शीतकालीन ओलंपिक में प्रतिस्पर्धा लेंगे.
कोर्ट याचिका के चलते स्तांजिन समारोह शुरू होने से केवल कुछ घंटों पहले ही इटली पहुंचे. 5 फरवरी 2026 को द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के स्पोर्ट्स एडिटर 'इन्द्रो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर यह जानकारी साझा की. उन्होंने लिखा, "क्लीयरेंस मिलने के बाद स्तांजिन लुंदुप ने फ्लाइट पकड़ ली है और 6 फरवरी से शुरू हो रहे शीतकालीन ओलंपिक के लिए रवाना हो चुके हैं. संभावना है कि वे ठीक समय पर उद्घाटन समारोह में पहुंच सकेंगे. यह पूरा असमंजस शायद टाला जा सकता था.”













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