ट्रंप सरकार का बड़ा फैसला: विदेशी दवाओं पर लगेगा 100% तक आयात शुल्क; घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने की तैयारी
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए आयातित पेटेंट दवाओं पर 100% तक टैरिफ लगाने की घोषणा की है. इस कदम का उद्देश्य विदेशी आपूर्ति श्रृंखलाओं पर निर्भरता कम करना और अमेरिका में दवा उत्पादन को पुनर्जीवित करना है.
वाशिंगटन: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (President Donald Trump) ने अमेरिका की स्वास्थ्य प्रणाली और सैन्य तैयारियों को सुरक्षित करने के उद्देश्य से एक बड़ा नीतिगत बदलाव किया है. गुरुवार को जारी एक आधिकारिक घोषणा के अनुसार, अमेरिका अब आयातित पेटेंट दवाओं (Imported Patented Pharmaceuticals) और उनके सक्रिय घटकों (APIs) पर 100 प्रतिशत तक आयात शुल्क (Tariff) लगाएगा. राष्ट्रपति ट्रंप ने तर्क दिया है कि विदेशी दवाओं (Foreign Medicines) पर अत्यधिक निर्भरता अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा (US National Security) के लिए खतरा पैदा कर रही है, जिसे घरेलू उत्पादन बढ़ाकर ही नियंत्रित किया जा सकता है. यह भी पढ़ें: Iran War Update: डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान; कहा- 'सैन्य अभियान लक्ष्य के करीब, समझौता नहीं हुआ तो किए जाएंगे और भी विनाशकारी हमले
राष्ट्रीय सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला का हवाला
राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा जारी उद्घोषणा में कहा गया है कि फार्मास्युटिकल सामग्री इतनी बड़ी मात्रा में और ऐसी परिस्थितियों में आयात की जा रही है, जो देश की सुरक्षा को कमजोर कर सकती है. प्रशासन ने चेतावनी दी है कि किसी भी भू-राजनीतिक या आर्थिक संकट के दौरान विदेशी उत्पादन पर निर्भर रहने से जीवन रक्षक दवाओं की आपूर्ति बाधित हो सकती है.
इस नई नीति के तहत, अधिकांश पेटेंट दवाओं पर 100 प्रतिशत 'एड वैलोरम ड्यूटी' लगेगी. हालांकि, जो कंपनियां अपना उत्पादन अमेरिका में स्थानांतरित करने की प्रतिबद्धता जताएंगी, उन पर शुरुआत में केवल 20 प्रतिशत टैरिफ लगेगा, जिसे चार साल बाद बढ़ाकर 100 प्रतिशत कर दिया जाएगा.
किसे मिलेगी छूट और किन पर कम होगा बोझ?
इस टैरिफ व्यवस्था में कुछ प्रमुख व्यापारिक भागीदारों और विशिष्ट दवाओं की श्रेणियों को राहत दी गई है:
- सहयोगी देश: यूरोपीय संघ, जापान, दक्षिण कोरिया और स्विट्जरलैंड से होने वाले आयात पर लगभग 15 प्रतिशत का कम टैरिफ लगेगा.
- विशिष्ट दवाएं: अनाथ दवाएं (Orphan drugs), न्यूक्लियर मेडिसिन और जीन थेरेपी को इस शुल्क से मुक्त रखा गया है.
- जेनेरिक दवाएं: फिलहाल जेनेरिक दवाओं और बायोसिमिलर को इस दायरे से बाहर रखा गया है, जो भारत जैसे देशों के लिए एक बड़ी राहत की बात है.
घरेलू उत्पादन को पुनर्जीवित करने का लक्ष्य
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीर ने व्हाइट हाउस में संवाददाताओं से कहा कि यह नीति केवल टैरिफ बढ़ाने के बारे में नहीं है, बल्कि उत्पादन के दीर्घकालिक पुनर्गठन के बारे में है. ग्रीर के अनुसार, कई कंपनियां पहले से ही इस बदलाव पर प्रतिक्रिया दे रही हैं और अमेरिका में नई फार्मास्युटिकल सुविधाओं का निर्माण शुरू हो चुका है.
इन टैरिफों को 31 जुलाई, 2026 से चरणों में लागू किया जाएगा. कुछ कंपनियों को उनके मौजूदा समझौतों के आधार पर समयसीमा में अतिरिक्त छूट भी दी जा सकती है. यह भी पढ़ें: US-Iran War: राष्ट्रपति ट्रंप ने 2 से 3 सप्ताह में शांति का जताया भरोसा, तेहरान ने दावों को किया खारिज
भारत और चीन पर संभावित प्रभाव
भारत और चीन दुनिया भर में जेनेरिक दवाओं और एपीआई (API) के सबसे बड़े उत्पादक हैं. हालांकि अभी जेनेरिक दवाओं को छूट दी गई है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भविष्य में इस टैरिफ का विस्तार होता है, तो इसका वैश्विक दवा कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला पर गहरा असर पड़ सकता है.
यह कार्रवाई 'ट्रेड एक्सपेंशन एक्ट' की धारा 232 के तहत की गई है, जो राष्ट्रपति को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा माने जाने वाले आयात को प्रतिबंधित करने की शक्ति देती है. इससे पहले इस कानून का इस्तेमाल स्टील और एल्युमीनियम पर टैरिफ लगाने के लिए किया गया था.