ब्रिटेन (Britain) की प्रधानमंत्री थेरेसा मे (Theresa May) का यूरोपीय संघ (EU) से अलग होने संबंधी ब्रेग्जिट समझौता (Brexit Deal) मंगलवार को संसद में पारित नहीं हो सका. इसके साथ ही देश के ईयू से बाहर जाने का रास्ता और जटिल हो गया है और मे की सरकार के खिलाफ अविश्वास पत्र लाने की घोषणा हो गई है. मे के समझौते को ‘हाउस ऑफ कामन्स’ (House of Commons) में 432 के मुकाबले 202 मतों से हार का सामना करना पड़ा. यह आधुनिक इतिहास में किसी भी ब्रिटिश प्रधानमंत्री की सबसे करारी हार है. इस हार के कुछ ही मिनटों बाद विपक्षी लेबर पार्टी के नेता जेरेमी कोर्बिन (Jeremy Corbyn) ने घोषणा की कि उनकी पार्टी मे की सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लेकर आएगी. ब्रिटेन 1973 में 28 सदस्यीय यूरोपीय संघ का सदस्य बना था. उसे 29 मार्च को ईयू से अलग होना है. ईयू से अलग होने की तारीख आने में केवल दो महीने बचे हैं, लेकिन ब्रिटेन अभी तक यह निर्णय नहीं ले पाया है कि उसे क्या करना है.
British Prime Minister Theresa May's Brexit deal defeated in UK Parliament, 432 No votes to 202 Yes votes pic.twitter.com/F1HXc3zFlg
— ANI (@ANI) January 15, 2019
ब्रेग्जिट के समर्थक और ब्रिटेन के ईयू में बने रहने के समर्थक दोनों विभिन्न कारणों से इस समझौते का विरोध कर रहे है. कई लोगों को आशंका है कि ब्रेग्जिट के कारण ब्रिटेन के यूरोपीय संघ के साथ व्यापार संबंध बिगड़ सकते हैं. मे की कंजर्वेटिव पार्टी के 100 से अधिक सांसदों ने समझौते के विरोध में मतदान किया. ब्रिटेन के हालिया इतिहास में यह किसी सरकार की सबसे करारी संसदीय हार है. इस हार के साथ ही ब्रेग्जिट के बाद ईयू के साथ निकट संबंध बनाने की टेरेसा मे की दो वर्षीय रणनीति का भी कोई औचित्य नहीं रहा. मे ने ‘हाउस ऑफ कामन्स’ में हार के बाद कहा कि सांसदों ने यह बता दिया है कि वे खिलाफ हैं, लेकिन यह नहीं बताया है कि वे किसका समर्थन करते हैं. यह भी पढ़ें- राफेल डील के ऑडिट की जानकारी देने से CAG का इनकार, कहा- संसद का विशेषाधिकार हनन हो जाएगा
संसद में परिणाम के बाद कोर्बिन ने कहा कि उनकी सरकार बुधवार को मे की सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश करेगी. ब्रिटेन की संसदीय प्रक्रिया के अनुसार, जब सांसद कोई विधेयक खारिज कर देते हैं, तो प्रधानमंत्री के पास ‘दूसरी योजना’ (प्लान बी) के साथ संसद में आने के लिए तीन कामकाजी दिन होते हैं. ऐसी संभावना है कि मे बुधवार को ब्रसेल्स जाकर ईयू से और रियायतें लेने की कोशिश करेंगी और नए प्रस्ताव के साथ ब्रिटेन की संसद में आएंगी. सांसद इस पर भी मतदान करेंगे. यदि यह प्रस्ताव भी असफल रहता है तो सरकार के पास एक अन्य विकल्प के साथ लौटने के लिए तीन सप्ताह का समय होगा.
बता दें कि इससे पहले थेरेसा मे ने यूरोपीय संघ से अलग होने का प्रस्ताव खारिज करने के लिए मतदान की तैयारी कर रहे सांसदों को आगाह किया था कि ब्रेग्जिट समझौता नहीं होना हमारे लोकतंत्र के लिए ‘‘भयावह और अक्षम्य’’ होगा. प्रधानमंत्री ने सांसदों से कहा था कि मंगलवार को संसद में होने वाले मतदान में ब्रेग्जिट के समर्थकों को निराश नहीं करना चाहिए. अलग होने के इस प्रस्ताव पर पिछले 18 महीने से बातचीत चल रही है. मे ने ‘संडे एक्सप्रेस’ में लिखा था, ‘‘ऐसा करना हमारे लोकतंत्र में भयावह और अक्षम्य होगा.’’ उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए, इस सप्ताहांत में संसद को मेरा संदेश बहुत सामान्य सा है. यह ‘गेम’ भूलकर और वह करने का वक्त है जो हमारे देश के लिए सही है.’’
भाषा इनपुट