सोमवार, 22 सितंबर की रात कोपेनहेगन और ओस्लो हवाई अड्डों के पास संदिग्ध ड्रोन नजर आए. इसके बाद कई घंटों के लिए एयरपोर्ट बंद करने पड़े. जांचकर्ताओं ने संभावित रूसी गतिविधि से पूरी तरह इनकार नहीं किया है.सोमवार, 22 सितंबर की रात डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन और नॉर्वे की राजधानी ओस्लो के हवाई अड्डे के पास संदिग्ध ड्रोन देखे गए. इस कारण दोनों हवाई अड्डों को कुछ घंटों के लिए बंद करना पड़ा. इससे दर्जनों उड़ानें रद्द हुईं, या दूसरी जगह भेजनी पड़ीं और हजारों यात्री प्रभावित हुए.
घटना की जानकारी देते हुए पुलिस ने बताया कि सोमवार रात "एक कुशल ड्रोन पायलट" ने कोपेनहेगन हवाई अड्डे के ऊपर दो से तीन बड़े और अज्ञात ड्रोन उड़ा. पुलिस ने कहा कि यह अज्ञात व्यक्ति स्कैंडिनेविया के सबसे बड़े हवाई अड्डे के ऊपर अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन दिखाता नजर आया. घटना के बाद मंगलवार को भी यात्राओं में विलंब की रहने की आशंका जताई गई है.
क्यों नहीं गिराए ड्रोन?
कोपेनहेगन पुलिस के वरिष्ठ पुलिस इंस्पेक्टर येस येसपर्सन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "अधिकारियों ने ड्रोन को शूट करने का फैसला नहीं किया क्योंकि खतरा बहुत अधिक था. हवाई अड्डा यात्रियों से भरा हुआ था, रनवे पर विमान थे और आसपास ईंधन डिपो भी मौजूद थे."
उन्होंने ड्रोन पायलट को "एक सक्षम खिलाड़ी" बताते हुए कहा कि "अपराधी अपनी कला दिखाना चाहता था" और शायद अपने तौर-तरीकों का अभ्यास कर रहा था. इसके पीछे किसका हाथ हो सकता है, इस बाबत येसपर्सन ने कहा कि इन ड्रोनों का रूस के किसी हाइब्रिड हमले का हिस्सा होने की संभावना को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता.
डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडेरिक्सन ने इसे "डेनमार्क के बेहद महत्वपूर्ण ढांचे पर हुआ अब तक का सबसे गंभीर हमला" बताया.
डेनमार्क के अतिरिक्त 22 सितंबर को ही इसी तरह की घटना नॉर्वे के ओस्लो हवाई अड्डे पर भी हुई. इसके कारण सारा हवाई यातायात एक रनवे पर भेजना पड़ा. नॉर्वेजियन ब्रॉडकास्टर 'एनआरके' के अनुसार, बाद में हवाई यातायात सामान्य हो गया. इस घटना का जिम्मेदार कौन था, यह साफ नहीं हुआ.
कोपेनहेगन पुलिस के अधिकारी येसपर्सन ने कहा कि अभी कोई सबूत नहीं है जो ओस्लो और कोपेनहेगन की घटनाओं को जोड़ता हो. हालांकि, अधिकारी संभावित संबंधों की जांच करेंगे.
नाटो के हवाई क्षेत्र में रूसी ड्रोन
पिछले कुछ हफ्तों के दौरान यूरोपीय हवाई क्षेत्र में रूस की गतिविधियां बढ़ती दिख रही हैं. नाटो सदस्य देशों के हवाई क्षेत्र में कई ड्रोन व लड़ाकू विमान घुसपैठ करते नजर आए हैं. एस्टोनिया ने इसी महीने अपने हवाई क्षेत्र में करीब 12 मिनट तक रूसी विमान के मौजूद रहने की बात कही थी. इसके अलावा पोलैंड ने भी उनकी सीमा में रूसी ड्रोन आने की जानकारी दी थी.
यूरोपीय संघ समेत सभी नाटो सहयोगियों ने इस घटना की निंदा की थी और इसे देशों की संप्रभुता का उल्लंघन बताया. इन घटनाओं के बाद से ही उत्तरी यूरोप में सुरक्षा संबंधी चिंताएं और बढ़ गई हैं.
पोलैंड की रूस को चेतावनी
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएसई) की आपातकालीन बैठक में पोलैंड के विदेश मंत्री रादोस्वाव शिरोस्की ने रूस को चेताया है. रूसी सरकार को सीधे संबोधित करते हुए शिरोस्की ने चेतावनी दी कि अतिक्रमण और उल्लंघन की स्थिति में उनके विमान मार गिराए जाएंगे. उन्होंने कहा, "अगर एक और मिसाइल या विमान हमारी सीमा में बिना अनुमति के घुसता है- चाहे जानबूझकर या गलती से- और उसे गिरा दिया जाता है और उसका मलबा नाटो के इलाके पर गिरता है, तो कृपया यहां शिकायत करने मत आना. आपको पहले ही चेतावनी दी जा चुकी है." रूस ने पोलैंड के दावों का खंडन किया है.
आरएस/एसएम (एपी,एएफपी)












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