भारत ने नहीं मानी अमेरिकी मध्यस्थता, पाकिस्तान ने खुद खोल दी ट्रंप के दावे की पोल
Pakistan Foreign Minister Ishaq Dar | Wikimedia Commons

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के उस दावे पर पाकिस्तान (Pakistan) ने खुद पानी फेर दिया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत ने कश्मीर मुद्दे पर उन्हें मध्यस्थता के लिए कहा था. पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार (Ishaq Dar) ने हाल ही में एक कार्यक्रम में स्वीकार किया कि भारत ने कभी भी किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को मंजूरी नहीं दी. यह बयान ट्रंप के दावों की सच्चाई उजागर करता है और भारत के पुराने रुख की पुष्टि करता है कि भारत-पाकिस्तान विवाद केवल द्विपक्षीय मामला है.

ऑपरेशन सिंदूर और अमेरिका का प्रस्ताव

इशाक डार के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अमेरिका ने युद्धविराम का प्रस्ताव रखा था. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने पाकिस्तान को भरोसा दिलाया था कि भारत से जल्द बातचीत करवाई जाएगी. लेकिन 25 जुलाई को वाशिंगटन में जब डार की रुबियो से मुलाकात हुई, तो उन्हें बताया गया कि भारत ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है.

भारत का साफ संदेश- बातचीत सिर्फ द्विपक्षीय

भारत का रुख हमेशा से स्पष्ट रहा है कि पाकिस्तान के साथ सभी मुद्दे सीधे बातचीत के माध्यम से ही सुलझाए जाएंगे, किसी तीसरे पक्ष को इसमें शामिल करने का सवाल ही नहीं उठता. पाकिस्तान को तीसरे पक्ष की भागीदारी से कोई दिक्कत नहीं, लेकिन भारत मानता है कि ऐसा करने से तनाव और भ्रम ही बढ़ेगा.

पाकिस्तान की बेचैनी और शर्तें

डार ने कहा, “हम किसी चीज की भीख नहीं मांग रहे. अगर भारत बातचीत चाहता है, तो हम तैयार हैं. लेकिन बातचीत केवल एक मुद्दे पर नहीं, बल्कि आतंकवाद, व्यापार, अर्थव्यवस्था और जम्मू-कश्मीर समेत सभी विषयों पर होनी चाहिए.”