भारतीय जहाजों पर गोलीबारी के बाद भारत ईरान संबंधों पर जोर
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

होर्मुज जलडमरूमध्य में दो भारतीय ध्वज वाले जहाजों पर कथित गोलीबारी के बाद ईरान के शीर्ष धार्मिक नेतृत्व के प्रतिनिधि ने भारत के साथ संबंधों को मजबूत बताया और शांतिपूर्ण समाधान की अपील की.होर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय ध्वज वाले दो जहाजों पर गोलीबारी की घटना के बाद ईरान ने भारत के साथ अपने संबंधों को मजबूत और स्थिर बताया है. भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा कि ईरान और भारत के बीच रिश्ते बहुत मजबूत हैं और उन्होंने उम्मीद जताई कि यह घटना शांतिपूर्वक सुलझा ली जाएगी. उन्होंने यह भी कहा कि ईरान युद्ध नहीं चाहता और पूरे क्षेत्र में शांति का पक्षधर है.

भारतीय अखबार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जिस घटना का जिक्र किया जा रहा है, उन्हें उसकी पूरी जानकारी नहीं है, लेकिन उन्होंने भरोसा जताया कि हालात बेहतर होंगे और समाधान निकल आएगा. उन्होंने यह भी कहा कि ईरान शांति चाहता है और उम्मीद करता है कि दूसरा पक्ष भी शांति का रास्ता अपनाए, ताकि क्षेत्र में स्थिरता बनी रहे.

भारतीय जहाजों पर गोलीबारी

इस बयान के बीच भारत सरकार ने शनिवार को ईरान के राजदूत को तलब कर इस घटना को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया. ईरान के राजदूत डॉ. मोहम्मद फतेह अली शनिवार शाम नई दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू भवन में विदेश मंत्रालय पहुंचे, जहां भारत ने जहाजों पर हुई गोलीबारी को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई. यह कदम ऐसे समय उठाया गया जब क्षेत्र में समुद्री तनाव तेजी से बढ़ रहा है.

शनिवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में हालात उस वक्त और गंभीर हो गए, जब ईरान द्वारा जलमार्ग को पूरी तरह से दोबारा खोलने से इनकार करने के बाद वहां से गुजरने का प्रयास कर रहे दो व्यावसायिक जहाजों पर कथित तौर पर गोलीबारी की गई. जहाजों की गतिविधियों पर नजर रखने वाली एजेंसियों के अनुसार, गोलीबारी के बाद दो भारतीय जहाजों को जलडमरूमध्य से लौटना पड़ा. यह जलमार्ग दुनिया के सबसे रणनीतिक और व्यस्त तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है.

अमेरिकी नाकेबंदी का ईरान ने दिया जवाब

अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों में प्रवेश करने या वहां से निकलने वाले जहाजों पर पूर्ण समुद्री नाकेबंदी लागू कर रखी है. अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड ने एक बयान में कहा कि उसने ईरान के समुद्री ट्रैफिक को निशाना बनाते हुए व्यापक अवरोध अभियान शुरू किया है. इसके तहत ईरान नियंत्रित बंदरगाहों में प्रवेश या निकासी करने वाले जहाजों की जांच की जाएगी और उन्हें आगे जाने से रोका जा सकता है.

ईरान ने अमेरिकी नाकेबंदी के जवाब में होर्मुज जलडमरूमध्य पर सैन्य नियंत्रण दोबारा लागू कर दिया है. तेहरान का कहना है कि जब तक अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर अपनी पाबंदियां हटाता नहीं है, तब तक वह इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से जहाजों की आवाजाही को सीमित रखेगा. हालिया घटनाओं ने इस मार्ग से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय जहाजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

22 अप्रैल पर होगी नजर

होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए दुनिया की कुल तेल खपत का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है. ऐसे में इस मार्ग पर किसी भी तरह का सैन्य तनाव या व्यवधान वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और तेल कीमतों पर असर डाल सकता है. मौजूदा हालात ने पहले से संवेदनशील वैश्विक ऊर्जा बाजार को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं.

इस बीच, भारत और ईरान दोनों पक्षों की ओर से यह संदेश दिया गया है कि द्विपक्षीय संबंधों को इस घटना से नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए. ईरान के वरिष्ठ प्रतिनिधि के बयान को भारत के साथ रिश्तों को शांत बनाए रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है. वहीं, भारत द्वारा राजनयिक स्तर पर विरोध दर्ज कराना यह दर्शाता है कि नई दिल्ली अपने जहाजों और नागरिक हितों की सुरक्षा को लेकर सजग है.

क्षेत्र में जारी इस समुद्री तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाते हैं. बुधवार 22 अप्रैल को अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम की समयसीमा खत्म हो रही है. ट्रंप और नेतन्याहू ने यह कहा है कि यदि कोई डील नहीं होती है, तो वे ईरान पर दोबारा बमबारी कर सकते हैं.