नई दिल्ली, 26 मई: देश की सबसे बड़ी चिकित्सा प्रवेश परीक्षा 'नीट-यूजी 2026' (NEET-UG 2026) के पेपर लीक मामले की जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (Central Bureau of Investigation) (CBI) को मंगलवार को एक बड़ी कानूनी सफलता मिली है. दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत (Rouse Avenue Court) ने मामले के मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक, शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर की पुलिस कस्टडी को एक और दिन के लिए बढ़ा दिया है. सीबीआई के विशेष न्यायाधीश अजय गुप्ता ने केंद्रीय एजेंसी के लोक अभियोजक (Public Prosecutor) की दलीलों को स्वीकार करते हुए यह आदेश जारी किया. पूर्व में मिली 9 दिनों की रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद सीबीआई ने मोटेगांवकर को अदालत में पेश किया था और कुछ महत्वपूर्ण डिजिटल रिकवरी तथा अन्य आरोपियों से आमना-सामना कराने के लिए एक दिन की अतिरिक्त हिरासत मांगी थी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया. अब आरोपी को बुधवार को दोबारा कोर्ट में पेश किया जाएगा. यह भी पढ़ें: NEET UG 2026: एनटीए ने शुरू की फीस रिफंड प्रक्रिया, जानें कैसे करें क्लेम और क्या हैं री-एग्जाम के नियम
केमिस्ट्री का पेपर परीक्षा से 10 दिन पहले ही मोबाइल पर आया: सीबीआई का दावा
राउज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई के दौरान सीबीआई की विशेष लोक अभियोजक नीतू सिंह ने दलील दी कि जांच बेहद नाजुक और शुरुआती दौर में है। सीबीआई के अनुसार, महाराष्ट्र के लातूर में 'आरसीसी कोचिंग इंस्टीट्यूट' (RCC Institute of Coaching) चलाने वाले शिवराज मोटेगांवकर के पास नीट परीक्षा की निर्धारित तिथि (3 मई 2026) से बहुत पहले, यानी 23 अप्रैल 2026 को ही नीट परीक्षा के केमिस्ट्री विषय के प्रश्न और उत्तर आ चुके थे.
केंद्रीय एजेंसी ने अदालत को बताया कि यह लीक प्रश्नपत्र आरोपी शिवराज के मोबाइल फोन से बरामद किया गया है, जिसे उसने कई अन्य लोगों और छात्रों को मोटी रकम के बदले फॉरवर्ड किया था। जांच अधिकारी और पुलिस उपाधीक्षक (Dy SP) पवन कुमार कौशिक ने कोर्ट को सूचित किया कि उनके पास एक ऐसा वीडियो साक्ष्य भी मौजूद है, जिसमें आरोपी स्वयं यह दावा करता दिख रहा है कि जो प्रश्न उसने छात्रों को दिए थे, वही मुख्य परीक्षा के प्रश्नपत्र में आए हैं.
प्रहलाद कुलकर्णी से सीधे संबंध; देशव्यापी वित्तीय लेनदेन खंगाल रही टीम
सीबीआई की जांच में यह भी सामने आया है कि शिवराज मोटेगांवकर इस रैकेट के एक अन्य प्रमुख आरोपी प्रहलाद कुलकर्णी के साथ सीधे और निरंतर संपर्क में था. दोनों मिलकर महाराष्ट्र, राजस्थान और दिल्ली के छात्रों को लीक पेपर बांटने का एक संगठित नेटवर्क चला रहे थे. कोर्ट ने पूर्व में टिप्पणी की थी कि यह एक बेहद शातिर और संगठित पेपर लीक गैंग (Organised Paper Leak Gang) का हिस्सा हैं.
सीबीआई के अनुसार, मोटेगांवकर की एक दिन की अतिरिक्त कस्टडी इसलिए जरूरी है, ताकि इस पूरे नेटवर्क के वित्तीय लेनदेन (Financial Trail) का पता लगाया जा सके, डिजिटल उपकरणों का विस्तृत फोरेंसिक विश्लेषण किया जा सके और इस गिरोह के शीर्ष पर बैठे मुख्य सरगना (Source of the Leaked Paper) तक पहुंचा जा सके. बचाव पक्ष के वकीलों ने कस्टडी बढ़ाने का विरोध किया था, लेकिन कोर्ट ने अपराध की संवेदनशीलता को देखते हुए रिमांड को मंजूरी दे दी. यह भी पढ़ें: NEET-UG 2026 पेपर लीक मामला: संसदीय समिति ने NTA प्रमुख से मांगे जवाब, पेपर लीक रोकने के लिए पुख्ता तंत्र बनाने पर जोर
राजस्थान एसओजी (SOG) की जांच में हुआ था भंडाफोड़
इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि देखें तो इस जघन्य राष्ट्रीय घोटाले का पर्दाफाश सबसे पहले राजस्थान की विशेष संचालन इकाई (SOG) की फैक्ट-फाइंडिंग जांच में हुआ था. एसओजी की रिपोर्ट में यह साफ कहा गया था कि 3 मई 2026 को आयोजित वास्तविक परीक्षा में आने वाले प्रश्नों का एक बहुत बड़ा हिस्सा परीक्षा से पहले ही इन आरोपियों द्वारा लीक और सर्कुलेट किया जा चुका था.
इसके बाद जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंपा गया, जिसने त्वरित कार्रवाई करते हुए मोटेगांवकर को पुणे से गिरफ्तार किया था. इसी साल सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले से जुड़े अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज करते हुए साफ किया था कि देश के लाखों छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले इस संगठित गिरोह के खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई की आवश्यकता है.












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