Kerala: अस्पताल के टॉयलेट में डिलीवरी के बाद 19 वर्षीय मां ने नवजात को खिड़की से बाहर फेंका, मुस्तैद स्टाफ ने बचाई मासूम की जान
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: File Image)

अलाप्पुझा (केरल), 26 मई: केरल (Kerala) के अलाप्पुझा जिले (Alappuzha District) में ममता को कलंकित करने वाली एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है. जिला प्रशासन और स्वास्थ्य अधिकारियों ने मंगलवार को पुष्टि की कि एक 19 वर्षीय युवती ने हरिपाद सरकारी अस्पताल (Haripad Government Hospital) के टॉयलेट (Toilet) के भीतर एक नवजात शिशु को जन्म देने के तुरंत बाद उसे शौचालय की खिड़की से बाहर नीचे फेंक दिया. यह खौफनाक वाकया मंगलवार तड़के घटित हुआ. गनीमत यह रही कि अस्पताल के नाइट-ड्यूटी मेडिकल स्टाफ ने मुस्तैदी दिखाते हुए इमारत के पिछले हिस्से से रोते हुए बच्चे को समय रहते बरामद कर लिया, जिससे वहां घूम रहे आवारा कुत्ते मासूम तक नहीं पहुंच सके. फिलहाल मां और बच्चे दोनों को बेहतर इलाज के लिए अलाप्पुझा के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां गहन चिकित्सा इकाई (ICU) में नवजात की हालत स्थिर बताई जा रही है. यह भी पढ़ें: Ranchi: बॉयफ्रेंड द्वारा दुष्कर्म के एक महीने बाद 17 वर्षीय छात्रा ने किया सुसाइड, पुलिस को मिला भावुक सुसाइड नोट

टॉयलेट से आई रोने की आवाज; स्टाफ ने टॉर्च जलाकर किया रेस्क्यू

अस्पताल प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार, युवती को मंगलवार तड़के पेट में तेज दर्द की शिकायत के बाद इमरजेंसी वार्ड में अवलोकन (Observation) के लिए रखा गया था. ऑन-ड्यूटी नर्सों ने गौर किया कि वह बहुत कम समय के भीतर कई बार अस्पताल के टॉयलेट की तरफ जा रही थी, जिससे स्टाफ को थोड़ा संदेह हुआ. इसी बीच, जब वह आखिरी बार टॉयलेट के केबिन में गई, तो कुछ ही देर बाद डॉक्टरों को एक नवजात के रोने की बहुत धीमी आवाज सुनाई दी.

स्थिति की संवेदनशीलता को भांपते हुए मेडिकल टीम ने तुरंत ऑन-ग्राउंड सुरक्षाकर्मियों और कर्मचारियों को सक्रिय किया और इमारत के बाहरी हिस्से की घेराबंदी कर तलाश शुरू की. नवजात शिशु टॉयलेट की खिड़की के ठीक नीचे एक कच्चे और पथरीले इलाके में पड़ा मिला, जहां कई आवारा जानवर लगातार घूम रहे थे. स्वास्थ्य कर्मियों ने बिना एक पल गंवाए बच्चे को गोद में उठाया और तुरंत आपातकालीन प्राथमिक उपचार दिया. डॉक्टरों का कहना है कि अगर बच्चे को ढूंढने में चंद मिनटों की भी देरी होती, तो यह हादसा घातक साबित हो सकता था.

अस्पताल में जांच से लगातार इनकार कर रही थी युवती; डॉक्टरों को था संदेह

हरिपाद सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि इस घटना से पहले ही मरीज के व्यवहार में कुछ विसंगतियां (Anomalies) देखी गई थीं, जिसने अस्पताल के आंतरिक सुरक्षा तंत्र को अलर्ट कर दिया था। ड्यूटी पर तैनात एक डॉक्टर ने बताया कि जब युवती शुरुआत में गंभीर पेट दर्द की शिकायत लेकर ट्राइएज डेस्क पर आई थी, तब डॉक्टरों ने उसकी शारीरिक और पेट की सामान्य जांच (Abdominal Examination) करनी चाही थी.

हालांकि, युवती ने किसी भी प्रकार की चिकित्सीय या शारीरिक जांच कराने से लगातार और पूरी तरह इनकार कर दिया. मरीज के इस असहयोगपूर्ण और अजीब व्यवहार के कारण ही डायग्नोस्टिक टीम को पहले ही संदेह हो गया था कि यह एक अवांछित या छिपाई गई गर्भावस्था (Concealed Pregnancy) का मामला हो सकता है, जिसे युवती दुनिया से छिपाना चाहती थी.

आईसीयू में भर्ती है नवजात; पुलिस ने दर्ज किया आपराधिक मामला

शुरुआती उपचार और नवजात को स्थिर करने के बाद, स्थानीय स्वास्थ्य विभाग के समन्वय से मां और शिशु दोनों को उच्च स्तरीय बाल रोग (Pediatric) और प्रसवोत्तर देखभाल के लिए अलाप्पुझा के विशिष्ट सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया है. बाल रोग विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर मिले इलाज के कारण बच्चा पूरी तरह खतरे से बाहर है.

दूसरी तरफ, स्थानीय पुलिस विभाग ने नवजात को लावारिस छोड़ने और उसकी जान जोखिम में डालने के गंभीर आरोपों के तहत औपचारिक जांच शुरू कर दी है. चूंकि यह कृत्य देश के सख्त बाल संरक्षण कानूनों (Child Protection Laws) का सीधा उल्लंघन है, इसलिए पुलिस अस्पताल के मेडिकल लॉग, सीसीटीवी फुटेज और ऑन-ड्यूटी स्टाफ के बयानों को दर्ज कर रही है. पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि डॉक्टरों द्वारा मां को चिकित्सकीय रूप से फिट घोषित किए जाने के तुरंत बाद उसके खिलाफ संबंधित वैधानिक कानूनी धाराओं के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.