BCCI's Sponsorship Misfortunes: जानिए कैसे टीम इंडिया की स्पॉन्सरशिप बनी कंपनियों के लिए बदकिस्मती, ड्रीम11 से पहले भी स्पॉन्सर का हो चुका है बंटाधार
ड्रीम11 और बीसीसीआई का Logo(Credit:X/Twitter)

BCCI's Sponsorship Misfortunes: भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के साथ जुड़ाव हर कंपनी के लिए बड़े सपनों को सच करने जैसा होता है. टीम इंडिया की जर्सी पर अपने नाम की छवि बनाना मार्केटिंग की दुनिया में सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जाती है. हर मैच में जर्सी पर स्पॉन्सर का नाम लाखों-करोड़ों फैंस के सामने आता है, जिससे यह बिलकुल सही मायने में दौलत और लोकप्रियता का स्रोत बन जाता है. लेकिन इस चमक-दमक के पीछे इसकी एक काली सच्चाई छुपी है. बीसवीं सदी के अंत तक और 21वीं सदी में भी, जब से BCCI ने अपनी टीम के लिए स्पॉन्सरशिप शुरू की, हर बड़ी कंपनी को कानूनी, आर्थिक या वित्तीय संकटों का सामना करना पड़ा है. ऐसा लग रहा है जैसे टीम इंडिया की जर्सी के स्पॉन्सरशिप में किसी प्रकार की शापछाया हो. एशिया कप 2025 से पहले टीम इंडिया की स्पॉन्सरशिप संकट; ड्रीम11 के बाद अब कौन बनेगा नया टाइटल स्पॉन्सर? ये 5 बिजिनस जायंट्स अजमा सकते हैं हाथ

सबसे ताजा नाम इस सूची में ड्रीम11 है। यह कंपनी 2023 में टीम इंडिया की स्पॉन्सर बनी, लेकिन अब Promo­tion and Regulation of Online Gaming Bill 2025 के लागू होने से यह संकट में है. यह बिल बहुप्रतिक्षित ऑनलाइन गेमिंग क्षेत्र को प्रत्यक्ष रूप से प्रतिबंधित करता है, जिससे ड्रीम11 को अपने ऑपरेशन रोकने पड़ सकते हैं. ड्रीम11 वह ऐप है जो फैंटेसी क्रिकेट के लिए जाना जाता है, जहां यूजर्स अपने मनपसंद खिलाड़ियों का टीम बनाते हैं और उस टीम के प्रदर्शन के आधार पर पैसे जीतने की कोशिश करते हैं. इस कानून के लागू होते ही ड्रीम11 पर पूरी तरह से पाबंदी लग जाएगी.

ITC (Wills) से लेकर ड्रीम11 तक का सफर

ITC (Wills और ITC Hotels): 1993 से 2001 तक भारतीय क्रिकेट टीम के पहले स्पॉन्सर थे. सीमित समय उनके लंबे योगदान के बाद सरकारी नियमों की वजह से यह साझेदारी खत्म हो गई.

सहारा इंडिया (2001-2013): यह सबसे लंबी और लोकप्रिय स्पॉन्सरशिप रही. सहारा का लोगो भारतीय टीम की जर्सी पर खासकर 2011 के विश्व कप जीत के दौरान खूब चमका. लेकिन बाद में Sahara के ऊपर निवेशकों को धोखा देने के आरोप लगे और कंपनी का राजनीतिक व कानूनी संकट शुरू हो गया. सुभ्रत रॉय की गिरफ्तारी और कोर्ट केस के चलते 2013 में उन्होंने स्पॉन्सरशिप वापस ले ली.

स्टार इंडिया (2014-2017): सहारा के जाने के बाद स्टार इंडिया ने टीम की स्पॉन्सरशिप हासिल की. यह अवधि विराट कोहली के उदय की भी रही. लेकिन कंपनी को मार्केटिंग डोमिनेंस के मामले में नियामक जांचों का सामना करना पड़ा. आखिरकार, स्टार ने 2017 में समझौता खत्म कर दिया. उसके बाद कंपनी को अपना शेयर बेचना पड़ा हैं.

Oppo (2017-2019): चीनी स्मार्टफोन ब्रांड ओप्पो ने एक बड़ा 1079 करोड़ रुपए का सौदा किया था, लेकिन केवल दो साल में वह पूर्व नियोजित अवधि से पहले बाहर हो गए. पेटेंट विवादों और कमजोर वित्तीय प्रदर्शन से कंपनी की छवि प्रभावित हुई.

Byju’s (2019-2023): BYJU’S ने Oppo से स्पॉन्सरशिप अधिकार खरीदे थे. इस दौरान कई विवादों और भुगतान समस्याओं ने कंपनी की स्थिति को कमजोर किया. अंत में 2023 में बीजूज़ ने यह साझेदारी समाप्त कर दी. अब कंपनी बुरे दौर से गुजर रही हैं.

Dream11 (2023-2025): फैंटेसी क्रिकेट प्लेटफॉर्म ड्रीम11 ने जुलाई 2023 से टीम इंडिया का स्पॉन्सरशिप हासिल किया, लेकिन हाल ही में लागू हुए "प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग बिल 2025" के कारण ड्रीम11 की पूरी कार्यप्रणाली प्रभावित हुई और कंपनी संकट में फंसी.

इस बिल के अंतर्गत रियल-मनी गेम्स पर पूरी तरह बैन लगा दिया गया है, चाहे वे स्किल-बेस्ड हों या लक पर आधारित हो. ड्रीम11 की सेवा को स्किल-बेस्ड माना जाता है, जो फैंटेसी टीम बनाकर रियल प्राइज जीतने पर आधारित है. इस बैन के बाद ड्रीम11 का भारत में व्यवसाय ठप होने की कगार पर है. हालांकि ड्रीम11 अब भी सब्सक्रिप्शन मॉडल के जरिए बिना रियल मनी के फैंटेसी गेम्स चला सकती है, पर इस मॉडल से उनकी आय बहुत कम हो जाएगी. इसलिए उन्हें बीसीसीआई की टीम स्पॉन्सरशिप में बने रहना मुश्किल होगा. भारतीय क्रिकेट की जर्सी पर स्पॉन्सरशिप लेना आकर्षक होते हुए भी जोखिम भरा बिजनेस साबित हुआ है, बीसीसीआई की टीम के साथ जुड़ी कंपनियों ने न केवल भारी रकम खर्ची है, बल्कि परेशानी और विवाद भी झेले हैं, ड्रीम11 का संकट इस श्रृंखला में नया अध्याय जोड़ता है.