Yusuf Pathan Land Encroachment Case: गुजरात हाईकोर्ट ने हाल ही में टीम इंडिया के पूर्व क्रिकेटर और तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद यूसुफ पठान को अतिक्रमणकारी करार दिया है. अदालत ने कहा कि यूसुफ पठान ने वडोदरा स्थित अपने बंगले के पास सरकारी जमीन पर कब्जा किया हुआ है और इसे तुरंत खाली करना होगा. साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी सेलिब्रिटी को कानून से ऊपर नहीं माना जा सकता और उन्हें छूट देना समाज के लिए गलत संदेश होगा. यह आदेश पिछले महीने गुजरात हाईकोर्ट की जस्टिस मौना भट्ट की सिंगल बेंच ने दिया. क्या Apollo टायर्स होगा टीम इंडिया का नया जर्सी स्पॉन्सर? 2027 तक 4.5 करोड़ प्रति मैच का डील हुई पक्की- रिपोर्ट
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने यूसुफ पठान की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने वडोदरा के तांडल्या इलाके में अपने बंगले से सटी सरकारी जमीन पर कब्जा बनाए रखने की अनुमति मांगी थी. यह मामला 2012 से चल रहा है, जब वडोदरा नगर निगम (VMC) ने नोटिस जारी कर उनसे जमीन खाली करने को कहा था.
अदालत ने कहा कि एक जनप्रतिनिधि और सार्वजनिक व्यक्ति होने के नाते यूसुफ पठान की जिम्मेदारी और भी अधिक है कि वे कानून का पालन करें. सुप्रीम कोर्ट के सिद्धांतों का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि अगर किसी सेलिब्रिटी को कानून तोड़ने के बावजूद छूट दी जाती है, तो इससे समाज में गलत संदेश जाएगा और न्याय व्यवस्था पर जनता का भरोसा कमजोर होगा.
दरअसल, वडोदरा नगर निगम ने 2012 में नोटिस जारी कर यूसुफ पठान को जमीन खाली करने को कहा था. इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. अपनी याचिका में पठान ने तर्क दिया कि उनकी और उनके भाई इरफान पठान की सुरक्षा के लिए यह जमीन जरूरी है और उन्हें इसे खरीदने की अनुमति दी जानी चाहिए, क्योंकि दोनों अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखने वाले क्रिकेटर हैं.
इस प्रस्ताव को नगर निगम ने राज्य सरकार को भेजा, लेकिन 2014 में सरकार ने इसे खारिज कर दिया. इसके बावजूद यूसुफ पठान ने जमीन पर कब्जा बनाए रखा हैं. अदालत ने साफ कहा कि राज्य सरकार द्वारा प्रस्ताव खारिज किए जाने के बाद यूसुफ पठान का इस जमीन पर कोई अधिकार नहीं है. आखिर में जस्टिस भट्ट ने आदेश दिया कि यूसुफ पठान को बिना किसी देरी के इस सरकारी जमीन को खाली करना होगा. अदालत ने यह भी दोहराया कि कानून सबके लिए समान है और कोई भी व्यक्ति चाहे वह सेलिब्रिटी ही क्यों न होकानून से ऊपर नहीं हो सकता हैं.













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