सोशल मीडिया की दुनिया में इन दिनों एक रहस्यमयी कीवर्ड "Umair Viral Video Pakistan 7:11 Minutes" ने हलचल मचा दी है. भारत और पाकिस्तान दोनों देशों के गूगल ट्रेंड्स और सोशल प्लेटफॉर्म्स पर लोग इस वीडियो को पागलों की तरह ढूंढ रहे हैं. डिजिटल विशेषज्ञों का मानना है कि यह चलन पिछले साल के कुख्यात '19-मिनट वीडियो स्कैम' की कार्बन कॉपी है. जहां एक खास समय (Time stamp) का हवाला देकर लोगों की जिज्ञासा को उकसाया जाता है, ताकि वे संदिग्ध लिंक पर क्लिक करें.
क्या है 7:11 मिनट का सच?
इंटरनेट पर दावा किया जा रहा है कि 'उमैर' नामक एक पाकिस्तानी कंटेंट क्रिएटर का 7 मिनट और 11 सेकंड लंबा कोई निजी वीडियो लीक हुआ है. दिलचस्प बात यह है कि अधिकांश सर्च करने वालों को कोई असली वीडियो नहीं मिला है. इसके बजाय, उन्हें धुंधली तस्वीरें, छोटे लूप क्लिप या 'लिंक इन बायो' जैसे संदेश मिल रहे हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि वीडियो की सटीक लंबाई (7:11) बताना एक 'मनोवैज्ञानिक हुक' है. इससे लोगों को लगता है कि वीडियो प्रामाणिक है और वे उसे खोजने के लिए असुरक्षित वेबसाइटों तक पहुंच जाते हैं.
साइबर सुरक्षा और फिशिंग का खतरा
यह ट्रेंड केवल जिज्ञासा का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे साइबर अपराधियों का बड़ा जाल हो सकता है. इस सर्च क्रेज का फायदा निम्नलिखित तरीकों से उठाया जा रहा है:
फिशिंग लिंक्स: सोशल मीडिया कमेंट्स और बायो में दिए गए लिंक अक्सर टेलीग्राम ग्रुप्स या ऐसी फर्जी वेबसाइटों पर ले जाते हैं जो आपका व्यक्तिगत डेटा चोरी करती हैं.
मैलवेयर का खतरा: वीडियो डाउनलोड करने के नाम पर यूजर्स के फोन या कंप्यूटर में वायरस और मैलवेयर डाले जा रहे हैं.
क्लिकबेट और एंगेजमेंट: कई पेज सिर्फ अपने फॉलोअर्स बढ़ाने के लिए इस नाम का इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि वास्तव में उनके पास कोई कंटेंट नहीं है.
19 मिनट वाले स्कैम से समानता
यह पहली बार नहीं है जब किसी विशिष्ट समय वाले वीडियो ने इंटरनेट पर तहलका मचाया हो. इससे पहले '19 मिनट 34 सेकंड' के वीडियो का ट्रेंड भी इसी तरह फैला था. हाल ही में 'पायल गेमिंग' और 'स्प्लिट्सविला' के कुछ कंटेस्टेंट्स के नाम पर भी इसी तरह के फेक और एआई-जनरेटेड (AI-generated) वीडियो वायरल करने की कोशिश की गई थी.
सावधानी ही बचाव है
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने यूजर्स को चेतावनी दी है कि वे ऐसे संदिग्ध कीवर्ड सर्च करने और किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें. यह न केवल आपकी प्राइवेसी के लिए खतरा है, बल्कि आपके बैंक खाते को भी खाली कर सकता है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के एल्गोरिदम अक्सर अधिक सर्च होने वाले शब्दों को 'ट्रेंडिंग' में डाल देते हैं, जिसका फायदा उठाकर स्कैमर्स अपनी पहुंच बढ़ाते हैं.













QuickLY