Viral Video: तमिलनाडु में लोगों ने दिवाली का जश्न खत्म करने के लिए एक-दूसरे पर गोबर फेंका
जब पूरा भारत दीये जलाकर और मिठाइयों और पटाखों के साथ दिवाली मनाता है, वहीं कर्नाटक-तमिलनाडु बॉर्डर पर एक छोटा सा गांव इस त्योहार को बिल्कुल अलग तरीके से मनाता है, जिसमें लोग एक-दूसरे पर गाय का गोबर फेंकते हैं. गोरेहब्बा फेस्टिवल नाम का यह अनोखा रिवाज 23 अक्टूबर को दिवाली के एक दिन बाद हुआ.
Viral Video: एक तरफ जहां पूरा भारत दीये जलाकर, मिठाइयों से मुंह मीठा करते हुए, पटाखों के साथ दिवाली मनाता है, वहीं दूसरी तरफ कर्नाटक-तमिलनाडु बॉर्डर (Karnataka–Tamil Nadu Border) पर एक छोटा सा गांव इस त्योहार को बिल्कुल अलग तरीके से मनाता है, जिसमें लोग एक-दूसरे पर गाय का गोबर फेंकते हैं. गोरेहब्बा फेस्टिवल (Gorehabba Festival) नाम का यह अनोखा रिवाज 23 अक्टूबर को दिवाली के एक दिन बाद हुआ और यह हर साल होने वाला एक ऐसा नजारा बन गया है जो ऑनलाइन देखने वालों को हैरान और शॉक कर रहा है. यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखकर लोग हैरान हो रहे हैं.
हर साल, बाली पद्यमी (Bali Padyami) पर, गुम्मटापुरा गांव (Gummatapura) के लोग इस अनोखे सेलिब्रेशन के लिए इकट्ठा होते हैं. माना जाता है कि यह उनके लोकल देवता बीरेश्वरा स्वामी (Beereshwara Swamy) के जन्म का प्रतीक है, जो किंवदंती के अनुसार गाय के गोबर में पैदा हुए थे. हिंदू परंपरा में गोबर को पवित्र और शुद्ध करने वाला माना जाता है. यह भी पढ़ें: Viral Video: बिजनौर में पुलिसकर्मी ने महिला को बाल पकड़कर घसीटा, वीडियो वायरल होने के बाद जांच के आदेश
दिवाली के जश्न को खत्म करने के लिए लोगों ने एक-दूसरे पर फेंका गोबर
रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिन की शुरुआत गांव वाले आस-पास के घरों से ताजा गाय का गोबर इकट्ठा करके करते हैं, उसे ट्रैक्टर ट्रॉलियों में लोड करते हैं, और आशीर्वाद सेरेमनी के लिए मंदिर ले जाते हैं. पुजारी द्वारा पवित्र किए जाने के बाद, गोबर को एक खुले मैदान में डाल दिया जाता है, जो आगे होने वाली चीज़ों के लिए ‘बैटलग्राउंड’ बन जाता है. आदमी और लड़के गोबर के ढेर में घुसकर अपना ‘हथियार’ बनाते हैं, और जल्द ही, हंसी, खुशी और नारों के साथ गोबर की दोस्ताना लड़ाई शुरू हो जाती है.
लेकिन, ऑनलाइन रिएक्शन मिले-जुले रहे. एक यूज़र ने कमेंट किया है-सॉरी, लेकिन छी. दूसरे ने लिखा- यह इंडियन कल्चर नहीं है, यह द्रविड़ियन कल्चर है. कुछ लोगों ने इसे आस्था से जुड़ी एक लोकल परंपरा बताकर इसका बचाव किया और इसे ‘गंगा से ज्यादा साफ’ बताया.