मेरठ (उत्तर प्रदेश) से एक ऐसी खबर आई है जिसने सबको हिलाकर रख दिया है और हमारे हेल्थ सिस्टम पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. यहां एक प्राइवेट अस्पताल में एक परिवार अपने बच्चे को रात में इलाज के लिए भर्ती कराता है. उन्हें उम्मीद थी कि उनका बच्चा सुबह तक बेहतर हो जाएगा. लेकिन सुबह जो हुआ, वो किसी बुरे सपने से कम नहीं था. परिवार को पता चला कि उनके बच्चे की मौत हो चुकी है.
परिवार का आरोप: 'यह इलाज नहीं, लापरवाही है'
बच्चे के परिवार वालों का रो-रोकर बुरा हाल है. उन्होंने अस्पताल पर सीधे-सीधे लापरवाही का इल्जाम लगाया है. उनका कहना है कि अस्पताल ने सिर्फ पैसे कमाने पर ध्यान दिया, बच्चे के सही इलाज पर नहीं. परिवार का आरोप है कि अगर अस्पताल ने लापरवाही न की होती और सही से इलाज किया होता, तो उनके बच्चे की जान बच सकती थी.
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क्या अस्पताल बन गए हैं 'पैसे कमाने की मशीन'?
यह कोई पहली घटना नहीं है. इस मामले के बाद लोग गुस्से में हैं और कह रहे हैं कि आजकल कई प्राइवेट अस्पताल सिर्फ पैसे कमाने का जरिया बन गए हैं. उन्हें मरीज की जान से ज्यादा अपने बिल की फिक्र होती है.
दूसरी तरफ, अगर आम आदमी सरकारी अस्पताल जाए, तो वहां का हाल भी किसी से छिपा नहीं है. सरकारी अस्पतालों में भी इलाज में लापरवाही की खबरें आए दिन आती रहती हैं.
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तो आम आदमी कहां जाए?
यह घटना एक बहुत बड़ा सवाल उठाती है — क्या आम आदमी के लिए अब एक भरोसेमंद स्वास्थ्य सेवा पाना मुश्किल हो गया है? जब प्राइवेट अस्पताल पैसे के लिए लापरवाही करें और सरकारी अस्पतालों में सही इलाज न मिले, तो आम इंसान आखिर किस पर भरोसा करे? इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच होनी चाहिए ताकि सच सामने आ सके.













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