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Viral Video: अपना हर दिन ऐसे जिओ जैसा कि आखिरी हो...सोशल मीडिया पर वायरल हुआ मां-बुआ की 'फ्यूनरल प्लानिंग', हंसी से लोटपोट हुए लोग

अंतिम संस्कार जैसे गंभीर विषय पर बातचीत से लोग अक्सर बचते हैं, लेकिन अमेरिकी पत्रकार रेश्मा गोपालदास ने इस विषय को इतनी सहजता और मजाकिया अंदाज में पेश किया कि सोशल मीडिया पर लोग हंसी नहीं रोक पा रहे हैं.

Viral Video: अपना हर दिन ऐसे जिओ जैसा कि आखिरी हो...सोशल मीडिया पर वायरल हुआ मां-बुआ की 'फ्यूनरल प्लानिंग', हंसी से लोटपोट हुए लोग
Photo- @reshmago/Instagram

Funeral Planning Viral Video: अंतिम संस्कार जैसे गंभीर विषय पर बातचीत से लोग अक्सर बचते हैं, लेकिन अमेरिकी पत्रकार रेश्मा गोपालदास ने इस विषय को इतनी सहजता और मजाकिया अंदाज में पेश किया कि सोशल मीडिया पर लोग हंसी नहीं रोक पा रहे हैं. जुलाई में शेयर किए गए उनके वीडियो "My mom & aunt tell me what they want for their funerals – they brought it up!" में उन्होंने अपनी मां और बुआ से उनके फ्यूनरल की इच्छाओं के बारे में पूछा. रेश्मा ने वीडियो की शुरुआत में बताया कि उन्होंने सिर्फ उस बातचीत को आगे बढ़ाया जो पहले हो चुकी थी, ताकि कोई डिटेल छूट ना जाए.

इसके बाद जो जवाब मिले, वो सीधे-सादे भी थे और गजब के मजेदार भी.

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मां-बुआ की 'फ्यूनरल प्लानिंग'

 

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'फ्यूनरल प्लानिंग' के सवाल पर बुआ का जवाब

जब बुआ से पूछा गया कि वे अपने अंतिम संस्कार के लिए क्या चाहेंगी, तो उन्होंने बिना एक सेकंड गंवाए कहा – "मुझे बस एक कार्डबोर्ड का डिब्बा चाहिए. वैसे तो हम क्रेमेशन करते हैं, तो उस बॉक्स में एक अच्छी खुशबू वाली परफ्यूम की बोतल रख देना क्योंकि मुझे अच्छी खुशबू पसंद है... बस इतना ही."

और उनकी अस्थियों का क्या होगा? इस पर उन्होंने उतनी ही बेबाकी से कहा – "कचरे में डाल दो, मुझे फर्क नहीं पड़ता. हमारे बिल्डिंग के बाहर एक डंपस्टर है, वहीं फेंक देना. शायद वो रीसाइक्लिंग में चला जाएगा."

'फ्यूनरल प्लानिंग' के सवाल पर मां का जवाब

मां का जवाब थोड़ा नरम लेकिन उतना ही सादा था, उन्होंने कहा, "मुझे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता, लेकिन मुझे याद है मेरी मां चाहती थीं कि उनकी अस्थियां उनके बगीचे में डाली जाएं क्योंकि उन्हें गार्डनिंग पसंद थी. तो मैं भी बहुत लचीली हूं." हालांकि उन्होंने एक बात पर जोर दिया, "मुझे कार्डबोर्ड बॉक्स ही चाहिए, महोगनी नहीं."

नेटिजन्स ने दी मजेदार प्रतिक्रिया

वीडियो देखने वालों को इन दोनों महिलाओं की ईमानदारी और ह्यूमर ने फौरन दीवाना बना दिया. एक यूजर ने लिखा, "आपकी बुआ कमाल हैं... सच कहूं तो मैं भी उतनी ही साफगोई और आत्मविश्वास चाहूंगी." दूसरे ने कहा, "ये बातचीत, चाहे गंभीर हो या मजाक में, हमें नॉर्मलाइज करनी चाहिए."

कुछ लोगों ने अपना निजी अनुभव भी साझा किया. एक कमेंट था, "काश हमने अपने पापा की बात सुनी होती जब उन्होंने कहा था कि वो क्रेमेशन चाहते हैं... उनकी अस्थियां हमेशा हमारे साथ रहतीं."

गंभीर पलों में भी हंसते हुए बात करें

रेश्मा का यह वीडियो इस बात का सबूत है कि जिंदगी के सबसे गंभीर पलों पर भी अगर हम खुलकर, हंसते हुए बात करें, तो डर और संकोच की जगह अपनापन और हल्कापन महसूस होता है.

(The above story first appeared on LatestLY on Aug 11, 2025 04:25 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).