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Fact Check: क्या गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में सरदार पटेल के बारे में गलत जानकारी दी? देखिए वायरल वीडियो की पड़ताल

सोशल मीडिया पर गृहमंत्री अमित शाह का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच जुबानी जंग छिड़ गई है.

Fact Check: क्या गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में सरदार पटेल के बारे में गलत जानकारी दी? देखिए वायरल वीडियो की पड़ताल

Amit Shah Sardar Patel Statement Fact Check: सोशल मीडिया पर गृहमंत्री अमित शाह का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच जुबानी जंग छिड़ गई है. कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने शाह के लोकसभा भाषण की एक क्लिप शेयर करते हुए दावा किया कि उन्होंने सरदार पटेल को 1960 में जिंदा बताया और कहा कि उन्होंने सिंधु जल समझौते का विरोध किया था. श्रीनेत ने सवाल उठाया कि जब सरदार पटेल का निधन 1950 में ही हो गया था, तो 1960 में वो किसी फैसले का विरोध कैसे कर सकते हैं?

उनके इस बयान के बाद विपक्षी नेताओं ने भाजपा को घेरते हुए आरोप लगाया कि सरकार के शीर्ष नेता इतिहास की बेसिक जानकारी भी नहीं रखते.

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कांग्रेस का गृह मंत्री अमित शाह पर तंज

सरदार पटेल जी का निधन 1950 में ही हो गया था

बीजेपी ने कांग्रेस के दावे को बताया भ्रामक

क्या है असली सच्चाई?

लेकिन यहां मामला थोड़ा पेचीदा है. जब गृह मंत्री अमित शाह का पूरा भाषण देखा गया, तो साफ हो गया कि भाषण के दौरान '1960 की बात' सिंधु जल संधि को लेकर थी. शाह ने कहा, 'सिंधु जल संधि में भी नेहरू ने भारत का 80% नदी जल पाकिस्तान को सौंप दिया था.' जब वह यह बात कह रहे थे, तो किसी विपक्षी नेता ने उन्हें टोक दिया. तब शाह ने '1960 की सिंधु जल संधि' की बात छोड़ दी और विपक्षी नेता को जवाब देने लगे.

उन्होंने कहा , "अगर सरदार पटेल होते, तो इस तरह के समझौते का विरोध करते". मतलब ये नहीं कि उन्होंने कहा कि पटेल 1960 में मौजूद थे, बल्कि उन्होंने एक काल्पनिक स्थिति को सामने रखा था.

कांट-छांट कर वायरल किया वीडियो

इस पूरे विवाद की जड़ वही वीडियो क्लिप है, जो सोशल मीडिया पर बिना संदर्भ के वायरल हो रही है. उसमें भाषण के शुरुआत और अंत के हिस्से काट दिए गए हैं, जिससे यह भ्रम हो रहा है कि शाह ने ऐतिहासिक गलती की है. कई भाजपा समर्थकों ने अमित शाह का पूरा भाषण शेयर करते हुए कहा कि वीडियो को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है और लोगों को गुमराह किया जा रहा है.

फिलहाल दोनों पक्ष अपनी बात पर कायम हैं. कांग्रेस इसे ऐतिहासिक चूक बता रही है, तो भाजपा इसे जानबूझकर फैलाया गया भ्रम बता रही है. सच्चाई क्या है, यह वीडियो का पूरा संदर्भ देखने पर ही समझ में आता है.

क्या कहता है इतिहास?

इतिहास की बात करें तो यह सच है कि सरदार वल्लभभाई पटेल का निधन 15 दिसंबर 1950 को हुआ था और सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में हुई थी. ऐसे में कोई भी दावा जो यह कहे कि पटेल ने उस संधि का विरोध किया था, वह तथ्यात्मक रूप से गलत होगा. लेकिन अगर किसी ने यह कहा कि 'अगर पटेल होते' तो विरोध करते, तो वह एक राय हो सकती है, न कि ऐतिहासिक दावा.

वायरल वीडियो की पड़ताल जरूर करें

यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि सोशल मीडिया पर वायरल क्लिप्स कितनी जल्दी गुमराह कर सकती हैं. आधा सच या संदर्भ से काटी गई जानकारी लोगों को भ्रम में डाल देती है. इसलिए किसी भी वायरल वीडियो को पूरा देखे बिना उस पर राय बनाना या उसे आगे शेयर करना सही नहीं है.

(The above story first appeared on LatestLY on Jul 29, 2025 05:34 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).