World Alzheimer's Day 2025: क्या है अल्जाइमर और इसका इतिहास? साथ ही जानें भारत में अल्जाइमर की स्थिति, चुनौतियां एवं कुछ फैक्ट्स!

  अल्जाइमर मस्तिष्क की एक ऐसी बीमारी है, जिससे याददाश्तसोचने और व्यवस्थित करने की क्षमता क्रमशः कम होती जाती है. अधिकांशतया यह बीमारी बढ़ती उम्र के कारण बताई जाती है. पिछले कुछ वर्षों से दुनिया भर में अल्जाइमर और डिमेंशिया पीड़ितों की संख्या तेजी से बढ़ी है. ताजा आंकड़ों के मुताबिक दुनिया भर में लगभग 5.5 करोड़ से ज़्यादा लोग अल्जाइमर और अन्य डिमेंशिया से पीड़ित हैं. भारत में भी इसकी स्थिति बहुत अच्छी नहीं है. यहां हम भारत के परिप्रेक्ष्य में अल्जाइमर की स्थिति, चुनौतियां एवं कुछ रोचक फैक्ट पर बात करेंगे.

विश्व अल्जाइमर दिवस का इतिहास

  विश्व अल्जाइमर दिवस की शुरुआत 21 सितंबर 1994 को एडिनबर्ग में अल्जाइमर डिजीज इंटरनेशनल (ADI) की 10वीं वर्षगांठ के अवसर पर की गई थी. इस दिवस का मुख्य उद्देश्य अल्जाइमर और उससे संबंधित मनोभ्रंश (डिमेंशिया) रोग के बारे में वैश्विक जागरूकता बढ़ाना हैताकि इससे पीड़ित लोगों और उनके परिवारों को सहायता और उचित मार्गदर्शन मिल सके. यह अभियान समय के साथ तेजी से विकसित हुआ और साल 2012 आते-आते विश्व अल्जाइमर माह की शुरुआत की गईजिसके कारण पूरे एक माह तक गतिविधियां और प्रचार-प्रसार संभव हो सका. हालांकि 21 सितंबर मुख्य फोकस बना हुआ है. यह भी पढ़ें : Partial Solar Eclipse 2025: इस सूर्य ग्रहण पर लग रहा समसप्तक योग क्या है? क्या भारत में दिखेगा सूर्य ग्रहण? जानें ज्योतिषियों की कुछ रोचक बातें!

भारत में अल्जाइमर की स्थिति

  भारत में अल्जाइमर और अन्य मनोभ्रंश के मामलों की संख्या 40 लाख से अधिक है, वर्तमान में यह संख्या तेजी से बढ़ रही है. अनुमानतः 2050 तक यह 70 प्रतिशत से अधिक हो सकती है. यह रोग मस्तिष्क में असामान्य प्रोटीन के जमा होने से होता हैजिसके कारण तंत्रिका कोशिकाओं के बीच का संपर्क प्रभावित होता हैजिससे मस्तिष्क का आकार सिकुड़ जाता है और याददाश्त में क्रमश कमी आने लगती है.

भारत में अल्जाइमर के आंकड़े और फैक्ट

भारत में 60 वर्ष और उससे अधिक उम्र के वयस्कों में डिमेंशिया (जिसमें अल्जाइमर एक प्रमुख प्रकार है) की अनुमानित प्रचलन दर लगभग 7.4 प्रतिशत है. इस एज ग्रुप में डिमेंशिया से प्रभावित लोगों की संख्या लगभग 80.8 लाख है. जानिये कुछ और फैक्ट और आंकड़े.

* प्राप्त सूत्रों के अनुसार महिलाओं में डिमेंशिया की दर पुरुषों से अधिक है.

* ग्रामीण क्षेत्रों में डिमेंशिया की दर शहर की तुलना में कुछ ज़्यादा पायी गयी है. ग्रामीण क्षेत्र में लगभग 8.4 प्रतिशत और शहरी क्षेत्र में लगभग 5.3 प्रतिशत बताई जाती है.

* इस बीमारी में शिक्षा के स्तर को भी एक बड़ा कारण माना जाता है. कम शिक्षित लोगों में डिमेंशिया का जोखिम ज्यादा पाया जाता है.

*  जानकारों का मानना है कि वर्तमान स्थिति इसी गति से बढ़ती रहीतो साल 2036 तक बुज़ुर्गों में डिमेंशिया की संख्या लगभग 16.9 मिलियन क्रॉस कर सकती है.

पहचान और चुनौतियां

* ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं आज भी कम विकसित हैं. न्यूरोलॉजिस्ट या मनोचिकित्सक की पहुंच कम होती है.

* अल्जाइमर के शुरुआती लक्षण को अक्सर बढ़ती उम्र की सामान्य प्रक्रिया मान लिया जाता हैकि याददाश्त कम हो रही है. इसलिए लोग डॉक्टर से सुझाव नहीं लेते हैं.

* शिक्षा और स्वास्थ्य साक्षरता कम होने से भी लोग लक्षणों को पहचानने और उपचार खोजने में देरी करते हैं.