Saint Ravidas Jayanti 2025: मेरा ईश्वर बंधा नहीं है, तो मैं उसे मंदिर या मस्जिद में कैसे बांध सकता हूं? देखें संत रविदास के ऐसे प्रेरक कोट्स!

   ईश्वर की सद्गुण और निर्गुण भक्ति के उपासक महान संतकविऔर समाज सुधारक गुरु रविदास जिन्हें रैदास के नाम से भी जाना जाता है. इनका जन्म 12 फरवरी 1388 में वाराणसी (उत्तर प्रदेश) के गोवर्धनपुर गांव में हुआ बताया जाता है. हिंदू पंचांग के अनुसार संत रविदास का जन्म माघ माह की पूर्णिमा को हुआ था. संत रविदास ने जात-पात का विरोध करते हुए समाज को आत्मज्ञान मार्ग की ओर अग्रसर किया था. संत रैदास का एक प्रसिद्ध मुहावरा था मन चंगा तो कठौती में गंगा आज भी बहुत प्रचलित है. संत रविदास ने अपने कर्मों से साबित किया था कि मनुष्य अपने जन्म से नहीं बल्कि अपने विचारोंदूसरों के हित की भावना और सद्व्यवहार जैसे गुणों से महान बनता है. संत रविदास की जयंती पर आइये, उनके रोचक एवं प्रेरक कोट्स अपने मित्र परिजनों को भेजकर महान संत को श्रद्धांजलि अर्पित करें.

* भगवान को किताबी शिक्षा या खोखले शब्दों से नहीं पाया जा सकताबल्कि केवल प्रेमपूर्ण भक्ति से पाया जा सकता है.

* हर दिन एक नई शुरुआत होती हैसूर्योदय भी होता है और सूर्यास्त भीजिंदगी चलती रहती हैहमारे आस-पास के लोग भी हमसे दूर चले जाते हैंऔर आज तक कोई भी मौत से बच नहीं सका. यदि संसार में कुछ भी सत्य है तो वह ईश्वर और मृत्यु है.

* भगवान को महलों में नहीं पाया जा सकताबल्कि केवल शुद्ध लोगों के दिलों में पाया जा सकता है.

* भगवान सभी प्राणियों में निवास करते हैंतो कौन नीचा है और कौन ऊंचा है?  -संत रविदास

* प्रभु को भूलने से व्यक्ति सबसे गरीब बन जाता है.

* जिसके पास प्रेम है उसके पास सब कुछ हैऔर जिसके पास प्रेम नहीं है उसके पास कुछ भी नहीं है.

* मेरा भगवान बंधा हुआ नहीं हैतो मैं उसे मंदिर या मस्जिद में कैसे बांध सकता हूं?

* भगवान को किताबी शिक्षा या खोखले शब्दों से नहीं पाया जा सकताबल्कि केवल प्रेमपूर्ण भक्ति से पाया जा सकता है.

* मेरी भक्ति ही मेरी जाति हैमेरा कर्म ही मेरा एकमात्र धर्म है.

* हृदय में ईश्वर के प्रति विश्वास रखो कि तुम हमें ज्ञान का प्रकाश दिखा रहे हो और अज्ञान रूपी मूर्खता से हमें दूर कर रहे हो.

* जो लोग हर पल श्रीराम का ध्यान करते हैं, उस पर न तो कोई क्रोध का असर होता है, और ना ही कोई दूसरी बुराई उस पर हावी हो सकती है. इसलिए भगवान में ध्यान लगाए रहना चाहिए.

समुद्र में तेज हवा की वजह से ऊंची-ऊंची लहरें उठती हैं, और फिर समुद्र में ही समा जाती हैं. समुद्र से अलग लहरों का कोई अस्तित्व नहीं है. ठीक उसी तरह परमात्मा के बिना इंसान का भी कोई अस्तित्व नहीं है.

* परमात्मा ऐसे लोगों के ह्रदय में निवास करते हैं, जो ईर्ष्या, क्रोध, मोह, अहंकार जैसी बुराइयों से दूर रहते हैं.

* कभी भी अपनी शक्तियों पर घमंड न करें, क्योंकि सभी के गुण अलग-अलग होते हैं. एक छोटी सी चींटी शक्कर के दानों को बिन सकती है, लेकिन एक आदमी ये काम नहीं कर सकता है.