Surya Grahan 2020: क्या है ‘चूड़ामणि सूर्य ग्रहण’? जानें नए साल में कब-कब लग रहे हैं सूर्य ग्रहण! और क्या होगा इसका असर!
सूर्य ग्रहण, (Photo Credits: Pixabay)

Surya Grahan 2020: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse) व्यक्ति विशेष के जीवन को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है. साल 2019 का अंतिम सूर्य ग्रहण सूतक काल में 26 दिसंबर को लग रहा है. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार नववर्ष यानी 2020 में दो सूर्य ग्रहण लगेंगे, पहला सूर्य ग्रहण 21 जून 2020 को, जो ‘चूड़ामणि सूर्य ग्रहण’ कहलाएगा और दूसरा सूर्यग्रहण 14 दिसंबर 2020 को लगेगा, ये खग्रास सूर्य ग्रहण होगा. विशेषज्ञों के अनुसार चूड़ामणि सूर्य ग्रहण का खास महत्व होता है. आइए जानें क्या होता है चूड़ामणि सूर्य ग्रहण? इसके क्या और कैसे असर होंगे? साथ ही जानिए ये सूर्य ग्रहण कहां-कहां नजर आएगा.

क्या होता है ‘चूडामणि ग्रहण’

रविवार के दिन लगने वाले सूर्यग्रहण को ही ‘चूड़ामणि सूर्य ग्रहण’ कहते हैं. चूंकि रविवार सूर्य का प्रिय दिन बताया जाता है, इसलिए ‘चूड़ामणि सूर्य ग्रहण’ का विशेष महत्व होता है. इस दरम्यान सूर्य चूड़े के समान दिखता है, इसीलिए इसे चूड़ामणि शब्द दिया गया है. इस दिन पवित्र नदी में स्नान-दान, जप-तप और पूजा-पाठ आदि का बहुत महत्व होता है. नए वर्ष का सूर्य ग्रहण आषाढ़ी अमावस्या के दिन पड़ रहा है, जो न केवल जनमानस के लिए शुभ नहीं माना जा रहा है, बल्कि शासन सत्ता के लिए भी प्रतिकूल बताया जा रहा है.

नववर्ष का पहला सूर्य ग्रहण

आगामी नववर्ष यानी 2020 का पहला सूर्य ग्रहण 21 जून रविवार को पड़ रहा है. ज्योतिषाचार्य श्री रवींद्र पाण्डेय के अनुसार यह सूर्य ग्रहण मिथुन राशि में कृष्ण पक्ष के दौरान अमावस्या तिथि और मृगशिरा नक्षत्र में लग रहा है. रविवार के दिन सूर्य ग्रहण होने के कारण इसे ‘चूड़ामणि सूर्य ग्रहण’ कहते हैं. हिंदू धर्म में ‘चूड़ामणि सूर्य ग्रहण’ का विशेष महत्व होता है. पृथ्वी पर यह सूर्य ग्रहण स्थानीय समयानुसार 9 बजकर 15 मिनट पर लगेगा, 12 बजकर 10 मिनट पर परमग्रास रहेगा जबकि 3 बजकर 04 मिनट पर ग्रहण समाप्त हो जाएगा. इस अवधि में स्नान, जाप और पूजा-पाठ का विशेष महत्व होता है. मान्यतानुसार ग्रहणकाल में कोई भी मंत्र सिद्ध करने से सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

कहां-कहां दिखेगा

21 जून 2020 को पहला सूर्य ग्रहण प्रातःकाल 09.15 मिनट से दोपहर 15.04 मिनट तक रहेगा. यह सूर्य ग्रहण भारत के अलावा दक्षिण पूर्व यूरोप, हिंद महासागर, प्रशांत महासागर, अफ्रीका और उत्तरी अमेरिका और दक्षिण अमेरिका के प्रमुख हिस्सों में देखा जा सकेगा.

दूसरा सूर्य ग्रहण:

साल 2020 का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण 14 एवं 15 दिसंबर के मध्य (सोमवार और मंगलवार) को पड़ रहा है. ज्योतिषाचार्य श्री पाण्डेय के अनुसार यह सूर्य ग्रहण वृश्चिक राशि में कृष्णपक्ष के दौरान ज्येष्ठा नक्षत्र और अमावस्या तिथि के दिन पड़ेगा. 14-15 दिसंबर 2020 को पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा, जो सायंकाल 07.30 बजे से रात्रि 11.03 बजे तक रहेगा. यह सूर्य ग्रहण दक्षिण अफ्रीका के कुछ क्षेत्रों सहित अधिकांश दक्षिण अमेरिका, प्रशांत महासागर, अटलांटिक, हिंद महासागर और अंटार्कटिका में दिखेगा. भारत में इसका असर नहीं रहेगा.

अपनाएं कुछ सावधानियां

ग्रहण लगे सूर्य को नंगी आंखों से नहीं देखना चाहिए. इसे देखने के लिए घिसे हुए कांच का इस्तेमाल करें. इससे आंखें खराब नहीं होंगी. अन्यथा बड़ी थाली में पानी भरकर उसमें सूर्य का प्रतिबिंब देखें. ग्रहण स्पष्ट नजर आएगा. मान्यता है कि इस दौरान छूरी अथवा कोई भी धारदार वस्तु का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए.

ग्रहण काल में बेहतर होगा कि बंद कमरे में सभी लोग एक साथ रहें. यहां तक कि जब तक ग्रहण लगा हो उस समय स्नान नहीं करना चाहिए और ना ही किसी देवी-देवता का पूजा अर्चना करना चाहिए. कोशिश करें कि इस दौरान न खाना खाएं और न ही पानी आदि पिएं. ज्योंतिषियों का कहना है किग्रहण काल में महा मृत्युंजय का जाप करना बहुत श्रेयस्कर होता है, ऐसे लोगों पर सूर्य ग्रहण का विपरीत असर नहीं