हमारी पृथ्वी की सुरक्षा में प्राकृतिक संसाधनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है.जल, वायु, मिट्टी, ऊर्जा, वनस्पति, खनिज, जीव-जंतु समेत प्रकृति के तमाम घटकों को संरक्षित करके पृथ्वी की प्राकृतिक सुंदरता को बरकरार रखा जा सकता है. ‘विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस’ हमें प्रकृति संरक्षण का संदेश प्रसारित और यह स्वीकारने का अवसर देता है कि एक स्वस्थ पर्यावरण और उत्पादक समाज की नींव होती है, इसलिए, अपने संसाधनों का संरक्षण और स्थायी प्रबंधन एकजुट होकर करना चाहिए. जिन संसाधनों पर हम निर्भर रहते हैं, वे पृथ्वी प्रदत्त हैं और सीमित हैं. गौरतलब है कि प्रत्येक वर्ष 28 जुलाई को विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस मनाया जाता है. आइये इस अवसर पर तथ्यपरक कोट्स अपने मित्र-परिजनों को भेजकर इस दिवस को सेलिब्रेट करें. यह भी पढ़ें : Nag Panchami & its Rituals 2025: भारत के विभिन्न अंचलों में नाग पंचमी के विविध रीति-रिवाज एवं परंपराएं!
प्रकृति और संरक्षण पर तथ्यपरक कोट्स
* ‘प्रकृति के साथ हर सैर में व्यक्ति जितना चाहता है, उससे कहीं ज़्यादा पाता है.’
-जॉन मुइर
* ‘आपके तारों, पेड़ों, सूर्योदय और हवा का क्या फायदा, अगर वे हमारे रोजमर्रा के जीवन में शामिल न हों.’
-ई.एम. फ़ॉस्टर
* ‘ताज़ी हवा और धूप जैसी कुछ पुराने ज़माने की चीज़ों को मात देना मुश्किल है.’
- लॉरा इंगॉल्स वाइल्डर
* ‘मेरी इच्छा हमेशा प्रकृति के एक कोने में शांति से रहने की है.’
-क्लाउड मोनेट
* ‘कुछ समय के लिए, मैं दुनिया की कृपा में विश्राम करता हूँ, और आज़ाद हूँ.’
-वेंडेल बेरी
* ‘हर सुबह मेरे जीवन को प्रकृति के साथ समान सादगी, और मैं कह सकता हूँ कि मासूमियत, में ढालने का एक हर्षित निमंत्रण थी.’
-हेनरी डेविड थोरो
* ‘प्रकृति ईश्वर की कला है.’
-दांते अलीघिरी
* ‘पृथ्वी वह है जो हम सब में समान है.’
— वेंडेल बेरी
* ‘अगर हम पर्यावरण को नष्ट करेंगे तो हमारा कोई समाज नहीं होगा.’
— मार्गरेट मीड
* ‘प्रकृति को गहराई से देखें, और तब आप सब कुछ बेहतर समझ पाएँगे.’
— अल्बर्ट आइंस्टीन
* ‘प्रकृति मुफ़्त में भोजन प्रदान करती है, लेकिन केवल तभी जब हम अपनी भूख पर नियंत्रण रखें.’
— विलियम रोल्स बॉस
* ‘पर्यावरण वह जगह है जहाँ हम सब मिलते हैं; जहाँ हम सबका साझा हित है.’
— लेडी बर्ड जॉनसन
* ‘हम दुनिया के जंगलों के साथ जो कर रहे हैं, वह उसी का प्रतिबिंब है जो हम अपने साथ कर रहे हैं.’
— महात्मा गांधी
* ‘पृथ्वी के बचे हुए हिस्से को संजोना और उसके नवीनीकरण को बढ़ावा देना ही हमारे अस्तित्व की एकमात्र वैध आशा है.’
— वेंडेल बेरी
* ‘प्रकृति घूमने की जगह नहीं, बल्कि घर है.’
-गैरी स्नाइडर













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