कुर्सी-सोफा नहीं, जमीन पर बैठकर करें कार्य, तमाम बिमारियों से मिलेगी निजात!
डाइनिंग टेबल, सोफा, झूले और आरामदेह कुर्सियों आदि पर बैठने के आदी होने के बाद लोग जमीन पर बैठना लगभग भूल गए हैं. लिहाजा अब उन्हें जमीन पर बैठने में तमाम किस्म की परेशानियाँ होती हैं, जो देखते ही देखते किसी न किसी रोग का रूप ले लेती हैं.
डाइनिंग टेबल, सोफा, झूले और आरामदेह कुर्सियों आदि पर बैठने के आदी होने के बाद लोग जमीन पर बैठना लगभग भूल गए हैं. लिहाजा अब उन्हें जमीन पर बैठने में तमाम किस्म की परेशानियाँ होती हैं, जो देखते ही देखते किसी न किसी रोग का रूप ले लेती हैं. यहां फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. जितेंद्र गुसाईं बता रहे हैं, कि जमीन पर बैठकर कार्य करना अच्छी सेहत के लिए क्यों जरूरी होता है.
डॉ. जितेंद्र गुसाई के अनुसार जमीन पर पालथी मारकर ध्यान करने से इंसान ज्यादा एकाग्र हो पाता है. इससे हड्डियों के दर्द, चिंता और तनाव से मुक्ति मिलती है. व्यक्ति स्वस्थ और चुस्त-दुरुस्त रहता है.
* जमीन पर बैठने से कंधों में पीछे की ओर खिंचाव होता है. इससे इसके आसपास के मसल्स भी सक्रिय होते हैं, जिससे उनमें मजबूती बनी रहती है. डॉ. जितेंद्र के अनुसार यदि आपकी पीठ में पहले से दर्द की शिकायत है, तो आपको जमीन पर बैठकर ही खाना खाना चाहिए, इससे पीठ-दर्द पर काफी हद तक नियंत्रण की शिकायत भी दूर होने लगती है. यह भी पढ़ें : सपने में खुद को या दूसरे को निर्वस्त्र देखना? जानें स्वप्न शास्त्र क्या कहता है?
* जमीन पर बैठकर खाना खाने से पाचन तंत्र सुचारु रूप से कार्य करता है, इससे खाना आसानी से पचता है. डॉ जितेंद्र बताते हैं कि जमीन पर बैठकर खाने की प्रक्रिया में निवाला लेने के लिए आगे झुकते हैं, इसके बाद निगलने के लिए स्ट्रेट होते हैं. इस आगे-पीछे की प्रक्रिया में पेट की मांसपेशियों की भी एक्सरसाइज हो जाती है, इस तरह मांसपेशियां मजबूत होती हैं.
* जमीन पर एक मैट बिछा कर ध्यान करने से मन तो एकाग्र होता ही है, साथ ही चयापचय (Metabolism) घटाने, रक्तचाप (BP) कम करने और दिल की धड़कन (Heart Beat), श्वास प्रक्रिया, मस्तिष्क की तरंगों के बेहतर होने में मदद मिलती है.
* जमीन पालथी मार कर ध्यान करने से सुषुम्ना नाड़ी स्थित शक्ति केंद्र या सात चक्रों को सक्रिय करने में मददगार साबित होती है. पालथी मारकर किए गए ध्यान से विश्राम की जैविक प्रतिक्रिया होती है.
* गलत तरीके से उठने-बैठने की आदत होने से बॉडी पॉश्चर बिगड़ जाता है. डॉ जितेंद्र बताते हैं, -ऐसी स्थिति में व्यक्ति को जमीन पर स्ट्रेट बैठना शुरू कर देना चाहिए. इससे शरीर की मुद्रा में धीरे धीरे सुधार आने लगता है.
* बाग के खुले वातावरण में जमीन अथवा घास पर मैट बिछाकर प्रतिदिन जमीन पर पालथी मारकर 15 मिनट तक बैठने से कूल्हे की मांसपेशियां मजबूत होती हैं, जिससे कमर-दर्द की संभावना कम रहती है.
* जमीन पर बैठने से रीढ़ की हड्डियों में खिंचाव आता है. इससे शरीर में लचीलापन बढ़ता है, जो अपेक्षाकृत कुर्सी या सोफा पर बैठने से नहीं होता. कभी कभी ज्यादा समय तक कुर्सी पर बैठने के कारण घुटने के पीछे की नस कठोर हो जाती है, इस वजह से मसल्स में दर्द होता है.
(The above story first appeared on LatestLY on Mar 25, 2022 03:37 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

