मुंबई के CSMVS में ‘नेटवर्क्स ऑफ द पास्ट’ गैलरी का उद्घाटन, भारत के प्राचीन वैश्विक संबंधों पर नई रोशनी

छत्रपति शिवाजी महाराज वास्तु संग्रहालय (CSMVS), मुंबई में एक नई स्थायी गैलरी ‘नेटवर्क्स ऑफ द पास्ट: भारत और प्राचीन विश्व का अध्ययन’ शुरू की गई है, जो भारत की प्राचीन सभ्यताओं और दुनिया के अन्य हिस्सों के बीच रहे ऐतिहासिक संपर्कों को सामने लाती है. यह गैलरी लगभग 5,000 वर्षों के इतिहास को समेटे हुए है और इसमें 300 से अधिक पुरातात्विक वस्तुएँ प्रदर्शित की गई हैं। ये वस्तुएँ भारत और विदेशों के 15 प्रतिष्ठित संग्रहालयों से लाई गई हैं, जो यह दिखाती हैं कि प्राचीन भारत केवल एक अलग-थलग सभ्यता नहीं था, बल्कि व्यापार, संस्कृति और विचारों के वैश्विक आदान-प्रदान का एक सक्रिय केंद्र रहा है.

थीम आधारित प्रस्तुति

पारंपरिक कालक्रम के बजाय, इस गैलरी को विषय-आधारित ढंग से सजाया गया है। इसमें कृषि, व्यापार, लेखन प्रणाली, धार्मिक विश्वास और कला जैसे विषयों के माध्यम से भारत के संबंध मेसोपोटामिया, मिस्र, फारस, चीन, ग्रीस और रोम जैसी प्राचीन सभ्यताओं से जोड़े गए हैं.

प्रदर्शित वस्तुओं में हड़प्पा काल की संरचनाएँ, रोमन काल की व्यापारिक वस्तुएँ, मिस्र से जुड़ी कलाकृतियाँ और प्राचीन भारत के शहरी नियोजन के उदाहरण शामिल हैं, जो उस दौर की व्यापक संपर्क व्यवस्था को दर्शाते हैं.

धोलावीरा मॉडल बना आकर्षण का केंद्र

गैलरी के प्रवेश द्वार पर गुजरात के धोलावीरा नगर का विस्तृत मॉडल लगाया गया है, जो हड़प्पा सभ्यता की उन्नत नगर योजना को दर्शाता है. यह प्रदर्शनी की थीम को स्पष्ट करती है कि प्राचीन भारत तकनीक, व्यापार और ज्ञान के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर जुड़ा हुआ था.

अंतरराष्ट्रीय सहयोग से साकार परियोजना

इस गैलरी को तैयार करने में चार वर्षों से अधिक समय लगा है. परियोजना को केंद्र सरकार के संस्कृति मंत्रालय और अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक संस्थानों का सहयोग प्राप्त हुआ है. इसमें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, राष्ट्रीय संग्रहालय, लंदन का ब्रिटिश म्यूज़ियम और बर्लिन के संग्रहालयों जैसी संस्थाओं ने भागीदारी की है.

CSMVS के महानिदेशक सब्यसाची मुखर्जी के अनुसार, यह गैलरी प्राचीन इतिहास को देखने का नजरिया बदलने की कोशिश है, जहाँ सभ्यताओं को अलग-अलग नहीं बल्कि आपस में जुड़े हुए रूप में प्रस्तुत किया गया है.