Lalita Panchami Vrat 2025: कौन हैं देवी ललिता? जानें ललिता देवी का दिव्य स्वरूप, महत्व, शुभ-मुहूर्त और पूजा-विधि इत्यादि!

   आश्विन शुक्ल पक्ष पंचमी यानी शरद नवरात्रि की पंचमी को भगवान शिव एवं स्कंद माता की पूजा करते हैं. इसी दिन दस महाविद्याओं में से एक ललिता देवी की पूजा-व्रत का भी विधान है. देवी ललिता को त्रिपुरा सुंदरीषोडशी और राजेश्वरी के नामों से भी जाना जाता है. उन्हें सुंदरताशक्ति और सौभाग्य की देवी माना जाता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार देवी ललिता का प्रकाट्य कामदेव के शरीर की राख से उत्पन्न भांडा नामक राक्षस के संहार के लिए हुआ था. इस दिन देवी ललिता की पूजा करने से नवविवाहित स्त्रियों और परिवार की सुख-शांति और जातक को विद्यासौभाग्यदीर्घायु और सुख-समृद्धि प्राप्त होता है. इस वर्ष 26 सितंबर 2025, को उपांग ललिता व्रत रखा जाएगा. आइये जानते हैं कौन हैं देवी ललिता एवं क्या है उनकी पूजा का महत्व, शुभ मुहूर्त एवं विधि इत्यादि.

कौन हैं ललिता देवी

   पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार कामदेव ने भगवान ब्रह्मा पर बाण चलाया, जिसके कारण ब्रह्मा जी के मन में अनुचित कामना पैदा हुई. कामदेव की क्रिया पर क्रोधित होकर भगवान शिव ने अपनी तीसरी आंख खोलकर कामदेव को भस्म कर दिया. कामदेव की राख से भंडासुर नामक शक्तिशाली राक्षस का जन्म हुआजिसने अपने क्रूर शासन से तीनों लोकों में हाहाकार मचा दिया. भंडासुर से भयभीत देवताओं ने उससे मुक्ति के लिए पराशक्ति की आराधना की. उनकी प्रार्थनाओं से प्रसन्न होकरदेवी ने अग्नि से प्रकट होकर ललिता त्रिपुर सुंदरी का रूप धारण किया. उन्होंने अपनी सेना के साथ भंडासुर से भीषण युद्ध किया और अंततः उसका वध करके ब्रह्मांड में शांति स्थापित की. यह भी पढ़ें : Shardiya Navratri 2025: मां कूष्मांडा का रहस्यमयी मंदिर, जहां की पिंडी से रिसते जल से दूर होते हैं आंखों के रोग

देवी ललिता का स्वरूपः देवी ललिता को त्रिपुरा सुंदरी, षोडशी और राजेश्वरी के नाम से जाना जाता है. देवी ललिता का स्वरूप अत्यंत कोमल, सौम्य और मोहक होता है, ह्रदय में प्रेम और भक्ति का संचार करता है. ब्रह्मांडीय संतुलन बनाए रखने के लिए वह एक भयंकर योद्धा के रूप में भी प्रकट होती. देवी की चार भुजाएं और तीन नेत्र हैं. देवी ललिता वस्तुतः देवी पार्वती की ही एक शक्ति हैं, और तंत्र-मंत्र साधना में इनका विशेष महत्व बताया गया है. उन्हें सुंदरता, शक्ति और सौभाग्य की देवी माना जाता है.

ललिता देवी की पूजा का शुभ मुहूर्तः

आश्विन शुक्ल पक्ष पंचमी प्रारंभ: 09.33 AM (26 सितंबर 2025)

आश्विन शुक्ल पक्ष पंचमी समाप्तः 12.03 PM (27 सितंबर 2025)

अभिजित मुहूर्तः 11.48 AM से 12:36 PM

पूजा-विधि 

   आश्विन शुक्ल पक्ष पंचमी को सूर्योदय से पूर्व स्नान-ध्यान करने के पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण करें. दाएं हाथ में लाल पुष्प एवं अक्षत लेकर ललिता देवी का ध्यान करते हुए व्रत एवं पूजा का संकल्प लें. पूजा स्थल पर देवी ललिता की प्रतिमा स्थापित करें. देवी के सामने धूप दीप प्रज्वलित करें, निम्न मंत्र का जाप करें. 

'ॐ श्री ललिता देव्यै नमः'

अब देवी को लाल कमल का पुष्प, लाल चुनरी, रोली, कुमकुम, अक्षत और सुहाग की वस्तुएं अर्पित करें. अब ललिता सहस्त्रनाम एवं ललिता त्रिशती का पाठ करें, इससे शुभता प्राप्त होती है , आर्थिक समस्याएं दूर होती हैं. भोग में  दूध से बनी खीर, दूध से बनी मिठाई एवं फल चढ़ाएं. अंत में ललिता देवी की आरती उतारें.