Kalashtami 2025: कालाष्टमी पर बन रहे इन 3 शक्तिशाली ग्रहों के दुर्लभ योग में करें काल भैरव की पूजा! हर मनोकामना पूरी होगी!
इस वर्ष आश्विन कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाई जाने वाली कालाष्टमी का विशेष महत्व बताया जा रहा है. ज्योतिषियों के अनुसार इस वर्ष तीन विशेष दुर्लभ एवं शक्तिशाली योगों (सिद्धि योग, रवि योग और शिव वास योग) का दिव्य संयोग बन रहा है. उनके अनुसार इन तीन शक्तिशाली योगों की उपस्थिति में भगवान काल भैरव की पूजा विशेष फलदायी होती है.
इस वर्ष आश्विन कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाई जाने वाली कालाष्टमी का विशेष महत्व बताया जा रहा है. ज्योतिषियों के अनुसार इस वर्ष तीन विशेष दुर्लभ एवं शक्तिशाली योगों (सिद्धि योग, रवि योग और शिव वास योग) का दिव्य संयोग बन रहा है. उनके अनुसार इन तीन शक्तिशाली योगों की उपस्थिति में भगवान काल भैरव की पूजा विशेष फलदायी होती है. माना जाता है कि इस दिन सच्ची श्रद्धा से की गई प्रार्थनाएं पूरी होती हैं और जातक को सारे कष्टों एवं पापों से मुक्ति दिलाती है. वस्तुतः भगवान शिव के उग्र स्वरूप माने जाने वाले भगवान भैरव को समर्पित कालाष्टमी हर माह मनाई जाती है, लेकिन इस माह इन दुर्लभ ग्रहों के संयोग में बने कालाष्टमी का महत्व कई गुना बढ़ जाता है. यह भी पढ़ें : Indira Ekadashi 2025: इंदिरा एकादशी के दिन श्राद्ध-कर्म का क्या महत्व है? जानें श्राद्ध एवं मोक्ष पर क्या कहता है गरुड़ पुराण!
कालाष्टमी व्रत तिथि और मुहूर्त
आश्विन कृष्ण पक्ष अष्टमी प्रारंभः 05.04 AM (14 सितंबर 2025, रविवार)
आश्विन कृष्ण पक्ष अष्टमी समाप्तः 03.06 AM (15 सितंबर 2025, सोमवार)
उदया तिथि के अनुसार 14 सितंबर 2025 को व्रत एवं पूजा रखा जाएगा.
कालाष्टमी का महत्व
हिंदू धर्म शास्त्रों में भगवान काल भैरव काल के देवता और दुष्टों के संहारक माने जाते हैं. मान्यता है कि कि प्रत्येक माह कालाष्टमी के दिन भगवान काल भैरव की पूजा करने से भक्तों की अकाल मृत्यु, भय और शत्रुओं से रक्षा होती है. कालाष्टमी का व्रत रखने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है. ज्योतिषियों का भी मानना है कि इस दिन व्रत एवं पूजा से जातक का करियर, व्यवसाय और धन से संबंधित तमाम समस्याओं का समाधान होता है, तथा समग्र शांति और समृद्धि सुनिश्चित होती है.
कालाष्टमी पूजा विधि (अनुष्ठान और मंत्र)
काल भैरव की पूजा को गंभीरता से लेना चाहिए. जरा-सी भूल अनिष्ठकारी हो सकती है. कालाष्टमी के दिन जातक को सूर्योदय से पूर्व स्नान-ध्यान करें. इसके पश्चात काल भैरव का ध्यान करके व्रत एवं पूजा का संकल्प लें. निकटतम काल भैरव मंदिर जाएं. वहां भगवान काल भैरव पर गंगाजल छिड़क कर उन्हें प्रतीकात्मक स्नान कराएं. सरसों के तेल का दीपक एवं धूप जलाएं. निम्न मंत्र का न्यूनतम 108 जाप करें. मन की कामनाएं पूरी होने का आशीर्वाद मांगें.
‘ॐ कालभैरवाय नमः’
अब काला तिल, उड़द की दाल, गुड़ और रोटी का भोग लगाएं. अनुष्ठान के बाद, काल भैरव चालीसा और भैरव अष्टक का पाठ करें. पूजा के पश्चात संध्याकाल के समय कुत्तों को भोजन कराना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है, क्योंकि उन्हें भगवान भैरव का वाहन माना जाता है. पूजा के पश्चात जरूरतमंदों को दान करने से पूजा को पूर्णता प्राप्त होती है.
(The above story first appeared on LatestLY on Sep 13, 2025 12:14 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

