इस्लामी कैलेंडर के बेहद पवित्र महीनों में से एक 'शाबान' का आगाज हो चुका है. साल 2026 में 20 जनवरी (चांद दिखने के अनुसार) से शाबान के महीने की शुरुआत हुई है. यह महीना मुस्लिम समुदाय के लिए विशेष महत्व रखता है क्योंकि इसे रमजान के पाक महीने का प्रवेश द्वार माना जाता है.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शाबान का महीना इबादत, तौबा (क्षमा) और बरकत का महीना है. इस दौरान दुनिया भर के मुसलमान रमजान के रोजों के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से खुद को तैयार करते हैं.
शब-ए-बारात और इबादत की रात
शाबान महीने की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता 'शब-ए-बारात' है. यह शाबान की 15वीं तारीख (14 और 15 तारीख की दरमियानी रात) को मनाई जाती है. इस साल यह रात 3 या 4 फरवरी 2026 (चांद के अनुसार) को होने की संभावना है.
शब-ए-बारात को 'मुक्ति की रात' कहा जाता है. इस रात मुस्लिम समुदाय के लोग मस्जिदों और घरों में रात भर जागकर विशेष नमाज अदा करते हैं, कुरान की तिलावत करते हैं और अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं. साथ ही, पूर्वजों की कब्रों पर जाकर उनके हक में दुआ भी की जाती है.
रमजान की तैयारी का आधार
शाबान का महीना रजब और रमजान के बीच आता है. हदीसों के अनुसार, पैगंबर मुहम्मद (सल्ल.) इस महीने में कसरत से रोजे रखा करते थे. विद्वानों का मानना है कि शाबान में नफिल रोजे रखने से रमजान के अनिवार्य रोजों के लिए सहनशक्ति बढ़ती है. इसी महीने में मुसलमान अपने साल भर के दान (जकात) और खैरात की योजना भी बनाते हैं ताकि रमजान में गरीबों की मदद की जा सके.
शाबान मुबारक: शुभकामनाएं और संदेश
सोशल मीडिया और निजी संदेशों के माध्यम से लोग एक-दूसरे को 'शाबान मुबारक' कहकर बधाई दे रहे हैं. इस मौके पर साझा किए जाने वाले कुछ प्रमुख संदेश इस प्रकार हैं:
"अल्लाह हम सबको शाबान की बरकतें नसीब करे और हमें रमजान तक खैरियत से पहुंचाए. शाबान मुबारक."
"इस पवित्र महीने में अपनी दुआओं में हमें याद रखें. अल्लाह आपकी हर जायज दुआ कुबूल फरमाए."
"शाबान का चांद मुबारक हो! इबादत और खुशियों का यह महीना आपके जीवन में शांति लाए."



धार्मिक और सामाजिक संदर्भ
शाबान के महीने में घरों में मीठे पकवान बनाने और पड़ोसियों के साथ बांटने की भी पुरानी परंपरा है. यह भाईचारे और सद्भाव का प्रतीक है. धार्मिक विशेषज्ञों के अनुसार, यह समय अपने विवादों को सुलझाने और मन की शुद्धि करने का सबसे उपयुक्त अवसर होता है ताकि पूरी पवित्रता के साथ रमजान का स्वागत किया जा सके.













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