Quotes On Jalaram 226th Jayanti 2025: भारत आदिकाल से संतों की भूमि रही है. इस देश ने ईश्वर सदृश्य महान संतों को जन्म दिया ऐसे ही एक संत जलाराम बापा (Jalaram Bapa) रहे हैं. जलाराम बापा का जन्म कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की सप्तमी में गुजरात (Gujarat) के राजकोट (Rajkot) के वीरपुर गांव में हुआ था. उनकी माता का नाम राजबाई ठक्कर था, एवं पिता का नाम प्रधान ठक्कर था. बचपन से ही उन्हें सांसारिक जीवन से विशेष लगाव नहीं था, वे भगवान श्री राम के परम भक्त थे. 18 वर्ष की आयु में तीर्थ यात्रा से लौटने के बाद, वह फतेहपुर के भोज भगत के शिष्य बन गए. अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार इस वर्ष 29 अक्टूबर 2025 को जलाराम बापा की 226 वीं जयंती मनाई जाएगी.
जलाराम जयंती करुणा, विनम्रता और निस्वार्थ सेवा के गुणों की सशक्त स्मृति कराती है. भक्त उनके पदचिन्हों पर चलकर, दान-पुण्य जैसे धर्म कार्य करके और उनके सम्मान में प्रार्थना करके इस दिन को सेलिब्रेट करते हैं. इस अवसर पर लोग एक-दूसरे को बधाई संदेश भेजते हैं. आप भी जलाराम बापा की इस जयंती पर अपने प्रियजनों को नीचे दिये कोट्स भेजकर शुभकामनाएं दे सकते हैं.
भक्ति पर कोट्स
1- ‘उनका प्रसिद्ध भजन, ‘सीता राम’, भगवान राम के प्रति उनकी गहरी भक्ति को दर्शाता है, जिनकी वे पूरी आस्था से पूजा करते थे.’

2- ‘ईश्वर के साथ एक सीधा और शक्तिशाली संबंध स्थापित करें, यही जलाराम बापा की सच्ची इच्छा है.’

3- ‘सिर्फ़ एक परिवार का ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया का पेट भरो, और तुम जलाराम जैसे बन जाओगे.’

4- ‘भूखों को भोजन कराना स्वयं ईश्वर का भोजन करने के समान है. आइए, निस्वार्थ सेवा के मार्ग पर चलें.’

5- ‘आपका जीवन आनंद, समृद्धि और सफलता से भरा रहे.’

6- ‘आइए, दया, भक्ति और विनम्रता के उनके सिद्धांतों को अपने जीवन में अपनाकर जलाराम जयंती मनाए.’जलाराम जयंती की शुभकामनाएं!’

7- ‘जलाराम बापा की निस्वार्थ सेवा और करुणा की शिक्षाएं हमें एक सार्थक जीवन की ओर ले जाती है.’ जलाराम जयंती की शुभकामनाएं!

8- ‘जलाराम बापा का दिव्य आशीर्वाद आपके जीवन को शांति और खुशियों से भर दे.’जलाराम जयंती की शुभकामनाएं

9- ‘सच्ची भक्ति मानवता की निस्वार्थ सेवा में निहित है.’ जलाराम जयंती की शुभकामनाएं!

10- ‘दीपक जलाओ तो प्रकाश मिलता है, धूपबत्ती जलाओ तो सुगंध मिलती है, भोजन मिले तो पेट भर जाता है, पानी मिले तो प्यास बुझ जाती है, और जलाराम बापा जैसा संत मिल जाए तो, तो जीवन-मरण का चक्र टल जाता है.’ आप सभी को जलाराम जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं।

कहा जाता है कि एक बार हरजी नाम के दर्जी के पेट में असहनीय पीड़ा हुई और सारी औषधियां जब निष्क्रिय हो गईं, तब वो जलाराम बापा के पास पहुंचे और अपनी पीड़ा के निवारण के लिए प्रार्थना की. जलाराम बापा ने उसकी पीड़ा के बारे में जानकर भगवान श्रीराम से उनकी पीड़ा हरने की प्रार्थना की, जिसके तुरंत बाद दर्जी की पीड़ा खत्म हो गई. हरजी के लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं था, लिहाजा वो जय हो बापा कहते हुए उनके चरणोंमें गिर पड़ा. कहा जाता है कि तब से उनके नाम के साथ बापा शब्द जुड़ गया और लोग उन्हें जलाराम बापा कहकर बुलाने लगे.













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