Pohela Boishakh 2025 Messages: बंगालियों का बहुप्रतीक्षित त्यौहार पोहेला बैसाख (Pohela Boishakh), जिसे शुभो नोबोबोरशो (Shubho Noboborsho) या पोइला बैसाख भी कहा जाता है, पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा और बांग्लादेश के कुछ हिस्सों में व्यापक रूप से मनाया जाता है. कई लोग इस बात को लेकर भ्रमित हैं कि बंगाल का नया साल 14 अप्रैल से शुरू होगा या 15 अप्रैल से. इस वर्ष, द्रिक पंचांग के अनुसार, भारतीय बंगालियों के लिए नया साल 15 अप्रैल, मंगलवार से शुरू हो रहा है. संक्रमण को चिह्नित करने वाला संक्रांति क्षण 14 अप्रैल सोमवार को सुबह 3:30 बजे होगा.
बंगाली कैलेंडर की उत्पत्ति 7वीं शताब्दी के गौड़ शासक राजा शशांक के शासनकाल से हुई है. बाद में मुगल सम्राट अकबर के शासन के दौरान इसमें बदलाव किया गया, जिन्होंने ज़मीन मालिकों के लिए कर संग्रह को आसान बनाने के लिए इस्लामी और बंगाली कैलेंडर को मिलाने की कोशिश की. नए साल की तारीख को कृषि चक्र के साथ मेल खाने के लिए प्रस्तावित किया गया था.
क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार, यह दिन नए कैलेंडर वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है और दुनिया भर के बंगालियों के लिए एक महत्वपूर्ण त्योहार है. शुभ दिन की शुरुआत सुबह मंदिरों में भक्तों के आने और प्रार्थना करने से होती है, जबकि व्यवसायी इसे नए उद्यम शुरू करने और अपने नए खाते खोलने के साथ और भी खास बनाते हैं, जिसे हाल खाता कहा जाता है. यह किसानों के लिए नई फसल के मौसम की शुरुआत है.
1. पुराना साल सबसे हो रहा है दूर,
क्या करें यही है कुदरत का दस्तूर,
बीती यादें सोचकर उदास न हो तुम,
पोइला बैसाख के जश्न में धूम मचाओ धूम.
पोइला बैसाख की शुभकामनाएं

2. प्यार के दिन और मोहब्बत भरी रातें हों,
रंजिशे-नफरतें मिट जाएं सदा के लिए,
सभी के दिलों में ऐसी चाहतें हों,
बंगाली नव वर्ष की शुभकामनाएं.
पोइला बैसाख की शुभकामनाएं

3. सूरज की तरह चमके,
पानी की तरह रहें शीतल,
बनी रहे शहद सी मिठास,
इस पोइला बैसाख है यही आस.
पोइला बैसाख की शुभकामनाएं

4. नया साल आए बनके उजाला,
खुल जाए आपकी किस्मत का ताला,
हमेशा आप-पर रहे मेहरबान ऊपर वाला,
यही दुआ करता है आपका चाहने वाला.
पोइला बैसाख की शुभकामनाएं

5. भुला दो बीता हुआ कल,
दिल में बसाओ आने वाला कल,
हंसो और हंसाओ, चाहे जो भी हो पल,
खुशियां लेकर आएगा आने वाला कल.
पोइला बैसाख की शुभकामनाएं

इसे बहुत जोश और उत्साह के साथ मनाया जाता है. पोहेला बैसाख के दौरान घरों में इलिश माछ, शुक्तो, चावल, मिठाई, ढोकर दाल और चनार दाल जैसे उत्सव के व्यंजन बनाए जाते हैं. घरों की सफाई के अलावा उन्हें सजाया भी जाता है. इस अवसर पर भगवान गणेश और लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है.










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