Navreh 2025 Greetings: नवरेह के इन मनमोहक WhatsApp Stickers, GIF Images, HD Wallpapers को भेजकर दें कश्मीरी नववर्ष की बधाई
नवरेह 2025 (Photo Credits: File Image)

Navreh 2025 Greetings in Hindi: एक तरफ जहां देश के विभिन्न हिस्सों में चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को हिंदू नववर्ष का पर्व अलग-अलग नामों से मनाया जाता है तो वहीं कश्मीरी पंडित इस दिन को नवरेह यानी कश्मीरी नववर्ष के तौर पर हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं. इस साल नवरेह (Navreh) यानी कश्मीरी नववर्ष (Kashmiri New Year) का पर्व 30 मार्च 2025 को मनाया जा रहा है. नवरेह यानी कश्मीरी नववर्ष का पर्व कश्मीरी पंडितों के लिए महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व रखता है. इस दिन की शुरुआत विभिन्न अनुष्ठानों से होती है, जिसमें सुबह सूर्योदय से पहले उठना, स्नान करना और परिवार के देवता की पूजा करना शामिल है. इस दिन विशेष पारंपरिक व्यंजन तैयार किए जाते हैं, जिनमें रोगन जोश, दम आलू, विभिन्न प्रकार के ब्रेड जैसे शीरमाल और बाकरखानी शामिल हैं. पारंपरिक पकवानों को परिवार और दोस्तों के साथ साझा किया जाता है, जो समृद्धि और एकजुटता का प्रतीक है.

देश के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले कश्मीरी पंडित कश्मीरी नववर्ष यानी नवरेह के त्योहार को अपनी परंपरा और रीति-रिवाजों के हिसाब से मनाते हैं. इस दिन वो अपने प्रियजनों, दोस्तों और करीबियों से मिलकर उन्हें नवरेह की शुभकामनाएं देते हैं, उनके साथ पारंपरिक पकवानों का लुत्फ उठाते हैं. ऐसे में इस पावन अवसर पर इन मनमोहक ग्रीटिंग्स, वॉट्सऐप स्टिकर्स, जीआईएफ इमेजेस, एचडी वॉलपेपर्स को भेजकर नवरेह की बधाई दे सकते हैं.

1- ‎नवरेह मुबारक

नवरेह 2025 (Photo Credits: File Image)

2- कश्मीरी नव वर्ष की हार्दिक बधाई

नवरेह 2025 (Photo Credits: File Image)

3- हैप्पी नवरेह

नवरेह 2025 (Photo Credits: File Image)

4- नवरेह की हार्दिक बधाई

नवरेह 2025 (Photo Credits: File Image)

5- कश्मीरी न्यू ईयर 2025

नवरेह 2025 (Photo Credits: File Image)

दरअसल, नवरेह पर्व कश्मीरी हिंदू परंपरा में नवरेह पोश्ती वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है, जिसे कश्मीर पंडित बेहद हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं. नवरेह को मनाने के लिए एक दिन पहले ही खास थाल तैयार की जाती है, जिसमें दूध, चावल, अखरोट, रोटी, नमक, फूल, दही जैसी सामग्रियों को रखा जाता है. नवरेह की सुबह उठने के बाद सबसे पहले परिवार के सभी लोग इस थाल के दर्शन करते हैं और स्नानादि के बाद भगवान की पूजा-अर्चना की जाती है. इस पर्व को महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा, कर्नाटक व आंध्र प्रदेश में उगादि, मणिपुर में साजिबू नोंगमा पानबा के तौर पर मनाया जाता है.