Kartik Purnima 2019: कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही भगवान विष्णु ने लिया था मत्स्य अवतार, जानें उनके पहले अवतार से जुड़ी पौराणिक कथा
भगवान विष्णु का मत्स्य अवतार (Photo Credits: Facebook/Instagram)

Kartik Purnima 2019: हिंदू धर्म में कार्तिक पूर्णिमा (Kartik Purnima) का बहुत महत्व बताया जाता है. प्रचलित पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा की शुभ तिथि पर ही भगवान शिव (Lord Shiva) ने त्रिपुरासुर (Tripurasur) का अंत किया था, जिसकी खुशी में दीप जलाकर, दीप दान करके देवताओं ने विजय दिवस मनाया था. हर साल कार्तिक महीने की पूर्णिमा तिथि को बनारस में देव दीपावली (Dev Diwali) का पर्व बहुत धूमधाम से मनाया जाता है. इस साल कार्तिक पूर्णिमा का यह पर्व 12 नवंबर 2019 (मंगलवार) को मनाया जा रहा है. इस दिन गुरपुरुब भी है, इसलिए इसका महत्व और भी ज्यादा बढ़ जाता है. इस दिन भगवान विष्णु (Lord Vishnu) ने मत्स्य अवतार (Matsya Avatar) लिया था, जिसे उनका पहला अवतार माना जाता है.

कार्तिक पूर्णिमा की इस शुभ तिथि पर चलिए जानते हैं आखिर भगवान विष्णु को क्यों लेना पड़ा था मत्स्य अवतार और क्या है इससे जुड़ी पौराणिक कथा.

मत्स्य है भगवान विष्णु का पहला अवतार

पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, मत्स्य अवतार को भगवान विष्णु का पहला अवतार माना जाता है. इस अवतार में विष्णु जी मछली के रूप में प्रकट हुए थे. दरअसल, एक राक्षस ने जब वेदों को चुराकर समुद्र की गहराई में छुपा दिया था, तब वेदों की रक्षा के लिए भगवान विष्णु मे मत्स्य अवतार लिया था. उनके इस अवतार से एक और कथा जुड़ी हुई है, जिसके अनुसार संखासुर नामक राक्षस ने त्रिलोक पर अपना आधिपत्य जमा लिया था, जिसके बाद मदद मांगने के लिए सभी देवतागण भगवान विष्णु के पास पहुंचे. देवताओं को उनका वैभव लौटाने और संखासुर का वध करने के लिए उन्होंने मत्स्य अवतार लेने का फैसला किया. यह भी पढ़ें: Kartik Purnima 2019: कार्तिक पूर्णिमा का हिंदू धर्म में है खास महत्व, इस दिन गलती से भी न करें ये 10 काम, नहीं तो भुगतने पड़ सकते हैं दुष्परिणाम

संखासुर को पता चला कि देवताओं ने भगवान विष्णु से मदद मांगी है तो संखासुर देवताओं के शक्ति के स्रोत वेद स्रोतों के हरण का प्रयास करता है. इसके बाद उसने खुद को बचाने के लिए समुद्र में प्रवेश किया, लेकिन भगवान विष्णु के तेज से वो नहीं बच सका और भगवान विष्णु ने अपने दिव्य नेत्रों से संखासुर का पता लगा लिया. उन्होंने मत्स्य अवतार लेकर संखासुर का वध किया और वेद मंत्रों की रक्षा करते हुए देवताओं को उनका वैभव वापस लौटाया.

नोट- इस लेख में दी गई तमाम जानकारियों को प्रचलित मान्यताओं के आधार पर सूचनात्मक उद्देश्य से लिखा गया है और यह लेखक की निजी राय है. इसकी वास्तविकता, सटीकता और विशिष्ट परिणाम की हम कोई गारंटी नहीं देते हैं. इसके बारे में हर व्यक्ति की सोच और राय अलग-अलग हो सकती है.