Happy Chhath Puja 2020 Greetings: छठ पूजा की अपनों को भोजपुरी में दें शुभकामनाएं, भेजें ये प्यार भरे WhatsApp Stickers, GIF Images, Facebook Messages, Quotes और वॉलपेपर्स
छठ पूजा महापर्व के तीसरे यानी मुख्य पर्व की खुशियां तभी दोगुनी हो सकती है, जब इस पर्व की बधाई हम अपने दोस्तों, रिश्तेदारों और करीबियों के साथ बांटेंगे. इस पावन अवसर पर आप छठ पूजा के प्यार भरे भोजपुरी ग्रीटिंग्स, वॉट्सऐप स्टिकर्स, जीआईएफ इमेजेस, फेसबुक मैसेजेस, कोट्स और वॉलपेपर्स के जरिए अपनों को भोजपुरी में शुभकामनाएं देकर इस पर्व को खुशी-खुशी मना सकते हैं.
- Read in
- English
Happy Chhath Puja 2020 Greetings in Bhojpuri: सूर्य देव (Surya Dev) और छठ मैया (Chhath Maiyya) की उपासना के महापर्व छठ पूजा (Chhath Puja) का आज तीसरा दिन है और व्रती आज शाम को नदी या तालाब के पानी में खड़े होकर डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देंगे. मुख्य तौर पर उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और नेपाल के तराई वाले क्षेत्रों में मनाए जाने वाले छठ पूजा पर्व की धूम देश के कई हिस्सों में देखने को मिलती है. छठ पूजा मुख्य तौर पर सूर्य देव की उपासना का पर्व है, जो चार दिनों तक चलता है. आस्था के इस पर्व की शुरुआत कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से होती है और समापन सप्तमी तिथि को होता है, लेकिन इसका मुख्य पर्व कार्तिक शुक्ल षष्ठी को मनाया जाता है. मान्यता है कि छठ मैया (Chhath Maiyya) सूर्यदेव (Surya Dev) की बहन हैं. छठ पूजा के दिन व्रत रखकर विधि-विधान से सूर्य देव और छठ मैया की उपासना करने पर व्रतियों को आरोग्य, सुख-समृद्धि, धन और खुशहाली का आशीर्वाद प्राप्त होता है.
छठ पूजा महापर्व के तीसरे यानी मुख्य पर्व की खुशियां तभी दोगुनी हो सकती है, जब इस पर्व की बधाई हम अपने दोस्तों, रिश्तेदारों और करीबियों के साथ बांटेंगे. इस पावन अवसर पर आप छठ पूजा के प्यार भरे भोजपुरी ग्रीटिंग्स, वॉट्सऐप स्टिकर्स, जीआईएफ इमेजेस, फेसबुक मैसेजेस, कोट्स और वॉलपेपर्स के जरिए अपनों को भोजपुरी में शुभकामनाएं देकर इस पर्व को खुशी-खुशी मना सकते हैं.
1- छठ पूजा 2020 के शुभकामना

2- छठ पूजा 2020 के शुभकामना

3- छठ पूजा 2020 के शुभकामना

4- छठ पूजा 2020 के शुभकामना

5- छठ पूजा 2020 के शुभकामना

छठ पूजा जीआईएफ
गौरतलब है कि सूर्योपासना के इस पर्व को चैत्र शुक्ल षष्ठी और कार्तिक शुक्ल षष्ठी को साल में दो बार मनाया जाता है, लेकिन कार्तिक शुक्ल षष्ठी को मनाए जाने वाले वाले छठ पर्व का विशेष महत्व है. इस व्रत के दौरान तमाम व्रती 36 घंटे तक निर्जल निराहार रहते हैं, फिर शाम के समय किसी तालाब या नदी के पानी में खड़े डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देते हैं, जिसे संध्या अर्घ्य कहते हैं, फिर अगले दिन सूर्योदय के समय उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है, जिसे ऊषा अर्घ्य कहा जाता है. ज्ञात हो कि चार दिवसीय छठ पूजा के उत्सव में नहाय खाय, लोहंडा खरना, संध्या और ऊषा अर्घ्य शामिल है.
(The above story first appeared on LatestLY on Nov 20, 2020 09:06 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

