Gudi Padwa 2026: गुड़ी पड़वा कब है? जानें मराठी नव वर्ष की तिथि, शुभ मुहूर्त और परंपराएं

महाराष्ट्र और कोंकण समुदायों का पारंपरिक नव वर्ष 'गुड़ी पड़वा' इस वर्ष 19 मार्च 2026 को मनाया जाएगा. यह दिन चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का प्रतीक है और हिंदू चंद्र कैलेंडर की शुरुआत करता है। जानिए इस दिन का महत्व और पूजा की प्रमुख रीतियां.

गुड़ी पड़वा 2026 (Photo Credits: File Image)

Gudi Padwa 2026: हिंदू धर्म में नव वर्ष (Hindu New Year) के रूप में मनाया जाने वाला 'गुड़ी पड़वा' (Gudi Padwa) इस साल 19 मार्च 2026, गुरुवार को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा.  इस पर्व को महाराष्ट्र और गोवा में धूमधाम से मनाया जाता है, जबकि इसी दिन से मां दुर्गा की उपासना के पर्व चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri)  की शुरुआत होती है. गुड़ी पड़वा का यह पर्व न केवल महाराष्ट्र (Maharashtra) और गोवा (Goa) में बल्कि देश के अन्य हिस्सों में भी अपनी अनूठी सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है. इस दिन से चैत्र महीने की शुरुआत होती है और लोग नए संकल्पों के साथ नए साल का स्वागत करते हैं. यह भी पढ़ें: Holi Bhai Dooj 2026: होली भाई दूज कब है? जानें शुभ मुहूर्त, महत्व और तिलक लगाने का सही समय

तिथि और शुभ मुहूर्त

वैदिक पंचांग के अनुसार, गुड़ी पड़वा चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को मनाया जाता है। वर्ष 2026 के लिए शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:

चूंकि 19 मार्च को सूर्योदय के समय प्रतिपदा तिथि विद्यमान है, इसलिए मुख्य उत्सव इसी दिन मनाया जाएगा। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, यह वर्ष 'पराभव नाम संवत्सर' के रूप में प्रारंभ हो रहा है.

सांस्कृतिक और पौराणिक महत्व

गुड़ी पड़वा के साथ कई पौराणिक कथाएं जुड़ी हुई हैं. 'ब्रह्म पुराण' के अनुसार, इसी दिन भगवान ब्रह्मा ने ब्रह्मांड की रचना की थी, जिसे समय की शुरुआत माना जाता है. इसके अतिरिक्त, यह दिन भगवान राम के 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटने और रावण पर विजय प्राप्त करने के उपलक्ष्य में भी मनाया जाता है.

कृषि की दृष्टि से देखें तो यह त्योहार रबी की फसल की कटाई और वसंत ऋतु (Basant) के आगमन का भी प्रतीक है। ऐतिहासिक रूप से, मराठा साम्राज्य में छत्रपति शिवाजी महाराज की जीतों को सम्मान देने के लिए भी इसे खास महत्व दिया जाता है. यह भी पढ़ें: Rang Panchami 2026: 8 मार्च को मनाया जाएगा रंगों का त्योहार, जानें इस दिन का धार्मिक महत्व और पूजा विधि

प्रमुख परंपराएं और रीतियां

गुड़ी पड़वा के दिन घरों में सुख-समृद्धि के लिए कई विशेष रीतियां निभाई जाती हैं:

भारत के अन्य हिस्सों में भी इस दिन को अलग-अलग नामों से मनाया जाता है. कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में इसे 'उगादी', मणिपुर में 'सजिबु नोंगमा पानबा चेइराओबा' और कश्मीरी पंडितों द्वारा इसे 'नवरेह' के रूप में सेलिब्रेट किया जाता है.

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